वैवाहिक रिश्तों में मधुरता बनाएं रखें ज्योतिष के साथ

Indian Astrology | 05-Mar-2022

Views: 447
Latest-news

हर रिश्ता चाहे वह किसी भी सम्बन्ध पर आधारित हो, प्यार व विश्वास की नींव पर ही टिका होता है। जब तक किसी रिश्ते में विश्वास बना रहता है लोग परस्पर एक दूसरे की कमियों को नज़र अंदाज़ कर देते हैं और रिश्ते में मिठास बनाये रखने का भरसक प्रयास करते हैं। परन्तु कई बार लाख कोशिशों के बाद भी कोई रिश्ता टूट कर बिखरने लगे तो उसे संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है और विशेष तौर पर पति-पत्नी का आपसी सम्बन्ध।  

ज्योतिष में यह माना गया है की सभी ग्रह आकाश में घूमते हुए पृथ्वी के प्रत्येक प्राणी के जीवन में अच्छे-बुरे परिणाम सुनिश्चित करते हैं। इसका एक उदाहरण इस तरह से समझा जा सकता है की कभी तो पति-पत्नी अत्याधिक प्रेम के कारण एक- दूसरे से अलग होने का ख़याल भी मन में नहीं ला पाते और कभी वे नफरत से एक दूसरे का चेहरा भी देखना पसंद नहीं करते। इस विविधता का कारण आकाश में घूम या गोचर कर रहे ग्रह होते हैं।    

विपरीत परिस्थितयां इंसान को न चाहते हुए भी विवादों में उलझा देती है और वे कोई भी हल निकाल पाने में असमर्थ रहते हैं।  इससे उनके लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और यदि रिश्ता नया हो तो परिणाम और भी भयंकर सिद्ध होते हैं। ऐसे में, कई युगल अपनी शादी तोड़ने या हमेशा के लिए अलग होने का विचार भी बना लेते हैं। पर ज़रा ठहरिये। 

 

क्या आपकी कुंडली में हैं प्रेम के योग ? यदि आप जानना चाहते हैं देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्यों से, तो तुरंत लिंक पर क्लिक करें।

 

ज्योतिष यहाँ आपके बिखरते हुए रिश्ते को संभालने में आपकी मदद कर सकता है। जानने के लिए आगे पढ़िए – 

ज्योतिष- आपके रिश्ते का नया आयाम

कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले यह बहुत महत्वपूर्ण है की आप किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लें।  कई बार हम चीज़ों को देखने में असमर्थ होते हैं और किसी बड़े व अनुभवी रिश्तेदार या दोस्त की मदद हमें चीज़ों का नया पहलू देखने में मदद करती है।  एक ज्योतिषी आपकी कुंडली की ठीक से जांच कर, रिश्तों में कटुता का सही कारण पता लगा सकता है। जो कई बार आपकी सोच से परे होता है। 

वैसे तो यदि आपकी शादी कुंडली मिलान के बाद संपन्न हुई है तो रिश्तों में कटुता एक अस्थायी दौर भी हो सकता है।  क्यूंकि कुंडली मिलान यदि सही तरीके से करवाया जाये तो यह दोनों पति-पत्नी के मानसिक व शारीरिक मेल पर ही आधारित होती है। पर कई बार हम केवल सॉफ्टवेयर से कुंडली मिलान कर ही निर्णय ले लेते हैं जो की नहीं किया जाना चाहिए।  एक अनुभवी ज्योतिष की सलाह आपके बेशकीमती वैवाहिक जीवन को बचा सकती है। 

ज्योतिषी आपकी कुंडली की गहनता से जांच कर व आपकी चल रही दशा-अन्तर्दशा और ग्रहों की स्थिति से आपकी व आपके जीवन साथी की मनः स्थिति जान सकता है।  उसके पश्चात् वह यह निर्णय लेगा की क्या ग्रहों का कोई अस्थायी प्रभाव आपको प्रभाव दे रहा है ?

ग्रहों का अस्थायी प्रभाव दो-तीन प्रकार से हो सकता है- 

  • हो सकता है आपकी कोई बुरे ग्रह की दशा प्रारम्भ हुई हो जो आपके जीवन में वैवाहिक जीवन के साथ-साथ जीवन के अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रही हो। यदि दोनों पति-पत्नी में से किसी की भी अशुभ ग्रह की दशा प्रारम्भ हो जाये तो जीवन में उठा- पठक शुरू हो जाती है।  यह पहला संकेत है। 
  • हो सकता है आपकी कुंडली का कोई दुर्योग एक्टिवेट या कार्यान्वित हो गया है। कोई भी दुर्योग अपने दुष्प्रभाव वैवाहिक जीवन में आसानी से डाल सकता है।  यह दुर्योग कुंडली में जनम से ही उपस्थित हॉट्स है और दशा अवधि में कार्यान्वित हो जाता है। 
  • हो सकता है आपकी कुंडली में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो जो आपके आपसी संबंधों में खटास ला रही हो। शनि का दुष्प्रभाव वैवाहिक सुख में कमी लाता है। केवल शनि ही नहीं, बल्कि अन्य अशुभ ग्रह जैसे राहु, केतु, मंगल व सूर्य भी अपने गोचर से वैवाहिक जीवन में अस्थिरता ले आते हैं। परन्तु मूल रूप से राहु, केतु व शनि जो की किसी राशि में एक लम्बी अवधि के लिए गोचर करते हैं, युगल के प्रेम संबंधों को बिगाड़ते हैं। 

यदि ऐसा कुछ है तो आप ज्योतिषीय उपायों की मदद से ग्रहों के दुष्प्रभावों को दूर कर अपने जीवन का सामंजस्य फिर से स्थापित कर सकते हैं।  विभिन्न ज्योतिषीय उपाय आपके जीवन की कटुता को समाप्त करने में सक्षम है बस ज़रुरत है तो उन्हें सुयोग्य मन व स्थिर दिमाग से अपनाने की।   

 

अपनी कुंडली में राजयोगों की जानकारी पाएं बृहत कुंडली रिपोर्ट में

 

कैसे ज्योतिष आपके व्यक्तित्व में परिवर्तन ला आपके रिश्ते को बचाएगा?

विपरीत परिस्थितियों में सबसे पहले व्यक्ति अपना दिमागी संतुलन ही खोता है।  उसे अच्छे बुरे की पहचान नहीं रहती।  कहा भी गया है- "संकट समय विपरीत बुद्धि "। तो सबसे पहले अपना मानसिक संतुलन बनाये रखें।  इसके लिए आप किसी परिवार के सदस्य या ज्योतिषी की मदद ले सकते है।  ज्योतिष में चन्द्रमा को मन व मस्तिष्क का कारक कहा गया है। ज्योतिषी आपको चन्द्रमा के उपाय साथ-साथ करवा कर एक बेहतर मानसिक स्थिति में ला सकता है ताकि आप सही गलत की पहचान कर पाएं और समझ पाए की आखिर आपके जीवन में हो क्या रहा है ?

ज्योतिषी, आपकी कुंडली पर आधारित गणना के अनुसार आपको आपके अच्छे व बुरे समय से परिचित करवाएगा जिससे आप चीज़ों को और बेहतर ढंग से समझ व नियंत्रित कर पायेंगें। आप समझ पाएंगे की आखिर दिक्कत हो कहा रही है और क्या यह परेशानी दीर्घ कालिक है या कुछ ही समय में ख़तम होने वाली है। 

एक ज्योतिषी आपको अपने आप से बेहतर तरीके से अवगत करवा सकता है।  आपकी कुंडली के आधार पर वह आपको आपकी कमज़ोरी व शक्ति का एहसास करवा सकता है।  कई बार हम अपनी गलतियों को नहीं मानते पर यदि एक ज्योतिषी आपको आपके व्यक्तित्व के आधार पर आपकी गलतियों पर रौशनी डालेगा तो आप शायद उसको बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। यही प्रक्रिया आपके जीवन साथी के लिए भी की जा सकती है। ज्योतिषी एक मैरिज काउंसलर की भांति आप दोनों को आपके सही व गलत आदतों व क्रियाकलापों की ओर ध्यान दिलवाएगा।

आप साधारण से ज्योतिषीय उपायों से अपने जीवन की सबसे कीमती धरोहर को संजोयें रख सकते हैं।  रिश्ता तोड़ने में कोई देरी नहीं लगती पर उसकी कटुता हमें जीवन भर सहनी पड़ती है इसीलिए बेहतर है की रिश्ते को सहेजे रखने की हर संभव कोशिश की जाये। 

 

यह भी पढ़ें: एक सुखद विवाह का आधार- राशियों की अनुकूलता व कुंडली मिलान

 

क्या एक ज्योतिषी हमेशा ही रिश्ता बनाये रखने की बात कहेगा?

देखिये, यह ज़रूरी नहीं की हर रिश्ता सही मायनों में एक रिश्ता हो।  कई बार सामाजिक छवि व आर्थिक कारणों के कारण भी कई युगल अपनी शादी को न छटे हुए भी घसीटते रहते है जिसकी ज्योतिष बिलकुल भी अनुमति नहीं देता। 

कई बार किसी व्यक्ति की शादी उसके व्यवहार के बिलकुल विपरीत व्यक्ति से हो जाती है। यदि ऐसे युगल का हम कुंडली मिलान देखें तो निर्धारित तौर पर उनकी कुंडलियों का मिलान आपस में नहीं मिलेगा।  इसीलिए कुंडली मिलान अत्यन आवश्यक है।

यदि दो ऐसे लोग जो कुंडली के अनुसार कही भी एक दुसरे से मेल नहीं कहते तो वे शादी के रिश्ते में रह कर अपने जीवन के साथ अन्याय करते हैं ओर ऐसी स्थिति में उनका अलग हो जाना बेहतर है। 

परन्तु यह निर्णय किसी अनुभवी ज्योतिष से जिसे सभी ज्योतिष सिद्धांतों का ज्ञान हो, से सलाह के पश्चात ही किया जाना चाहिए। हर समय मानसिक या शारीरिक हिंसा किसी भी स्वस्थ रिश्ते का आधार नहीं हो सकती।

मानसिक प्रताड़ना भी किसी रिश्ते को तोड़ देने की एक ठोस वजह है, जिसे ज्योतिष स्वीकार करता है। यदि दोनों व्यक्तियों के गण, गुण, योनि, राशि, ग्रह व राशि स्वामियों में किंचित मात्र भी मित्रता नहीं है तो ऐसा रिश्ता स्थायी तौर से नहीं टिक सकता। कई बार कुंडली के लग्न या लग्न स्वामी या चन्द्रमा पर अशुभ व पापी ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति को गलत राह पर प्रवृत्त कर देते है जिससे उनका रिश्ता अंत में टूटने की कागार पर आ जाता है। 

ऐसे ग्रह व्यक्ति को कोई उपाय भी नहीं करने देते क्योंकि वह शुभता की ओर सोच ही नहीं पता ओर पाप कृत्यों में ही फंसा रहता है।  बाहरी सम्बन्ध, शराब व अन्य व्यसन, कलंकित ह्रदय व व्यवहारिक निष्ठुरता कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं।               

एक खुशहाल रिश्ते के लिए कुछ ज्योतिषीय उपाय

  • मंदिर जाकर गौरी-शंकर देव मूर्ती का पूजन करें। साथ में नियमित रूप से घी का दीपक जलाकर, शिव चालीसा का पाठ भी करें। 
  • हल्दी की साबुत गांठें हाथ में ले कर ॐ नमो भगवते वासुदेवायमंत्र का उच्चारण करें। उसके बाद इनको विष्णु जी को अर्पित करें। 
  • शुक्रवार को मंदिर में जाकर लक्ष्मी नारायण का पूजन करें व उन्हें दो गुलाब के फूल अर्पित करे। 
  • बृहस्पतिवार को पीले वस्त्र पहनकर, केले के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं व केले के पेड़ पर हल्दी या केसर का तिलक लगाएं। 
  • पीली रंग की चूड़ी पहनें।