करियर और किस्‍मत दोनों चमका सकता है सूर्य का यह रत्‍न, इस एक राशि वालों की तो बदल सकती है पूरी दुनिया

Indian Astrology | 21-Jan-2023

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कहते हैं कि रत्‍नों में इतनी ताकत होती है कि ये हमारी जिंदगी को पलट कर रख सकते हैं। रत्‍न जीवन को एक नई दिशा देने, मनचाही इच्‍छाओं को पूरा करने और समस्‍याओं को दूर करने का काम कर सकते हैं। रत्‍नशास्‍त्र में माणिक्‍य रत्‍न का भी उल्‍लेख किया गया है। यह रत्‍न अत्‍यंत चमत्‍कारिक और सुंदर होता है। इसे अंग्रेजी में रूबी कहा जाता है। रूबी स्‍टोन को रत्‍नों का नायक यानि रत्‍नायक भी कहते हैं।

रूबी नाम लैटिन शब्द 'रूबर' से लिया गया है, जिसका अर्थ लाल होता है। रूबी का रंग सबसे हल्के गुलाबी से गहरे लाल रंग में भिन्न होता है। हल्के रंग के माणिक महिलाओं के लिए उपयुक्त माने जाते हैं और गहरे रंग के माणिक पुरुषों के लिए अच्‍छे माने जाते हैं। यह उन लोगों के बीच एक आदर्श रत्न है जो लीडर हैं और प्रेम संबंध में हैं। रूबी को बाइबिल और प्राचीन संस्कृत लेखन द्वारा रत्नों के सबसे उत्तम रत्नों में से एक माना जाता है। रूबी रत्न सूर्य के साथ जुड़ा हुआ है, और माना जाता है कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखता है। बर्मा का रूबी स्‍टोन सबसे ज्‍यादा अच्‍छी क्‍वालिटी का माना जाता है।

 

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ज्‍योतिष में सूर्य का महत्‍व

 

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य आत्मा और पितृत्व पर शासन करता है। सूर्य अन्य सभी ग्रहों को प्रकाश प्रदान करता है। कुण्डली में सूर्य पितरों पर शासन करता है। सूर्य पर एक से अधिक अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो कुंडली में पितृ दोष बनता है। सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति सरकारी क्षेत्र में नौकरी करता है। सूर्य व्यक्ति को सिद्धांतवादी भी बनाता है। इसके अतिरिक्त सूर्य व्यक्ति को अनुशासित, प्रभावशाली, प्रशासक, विश्लेषक, आविष्कारक और समय के साथ सफलता प्राप्त करने वाला भी बनाता है। सूर्य मेष, सिंह और धनु राशि में होने पर अत्यंत बली होता है। सूर्य मेष राशि में उच्च का होता है। सिंह राशि, सूर्य की मूलत्रिकोण राशि है इसलिए यह सिंह राशि में बली होती है। यदि सूर्य बली हो और किसी भी अशुभ ग्रहों के प्रभाव से मुक्त हो तो व्यक्ति जीवन भर सफलता प्राप्त करता है और स्वस्थ रहता है। कुंडली में सूर्य के बली होने से व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ और ऊर्जावान होता है।

 

माणिक्‍य रत्‍न पहनने के लाभ

 

रूबी स्‍टोन का स्‍वामी ग्रह सूर्य देव को माना गया है। वही इस रत्‍न को ऊर्जा देते हैं। इस रत्‍न को पहनने से सूर्य देव से संबंधित क्षेत्रों में लाभ होता है। सूर्य की तरह, रूबी रत्न प्राकृतिक रूप से नेतृत्व के गुणों को बढ़ाता है और इस प्रकार इस रत्न को पहनने वाले को प्राधिकरण और प्रशासनिक पदों पर काम करने का मौका मिलता है।

माणिक रत्न आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है और यह रत्‍न भय पर काबू पाने में मदद करता है। लाल रूबी पहनने से प्यार, करुणा का भाव बढ़ता है।

लाल माणिक रत्न पहनने वाले को अवसाद से लड़ने में मदद मिलती है और आंखों की रोशनी और रक्त प्रवाह से संबंधित समस्‍याओं में भी सहायता मिलती है।

यदि सूर्य आपके दूसरे या चौथे भाव में है तो आपको पारिवारिक संबंधों में समस्या आ सकती है, इसलिए ऐसे लोगों को संबंधों को सुधारने के लिए यह रत्न धारण करना चाहिए। 

 

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माणिक्‍य रत्‍न कौन पहन सकता है

 

रूबी पहनने के बाद आपको प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता मिलने की अधिक संभावना रहती है। यह स्‍टोन चिकित्सक, कृषक, राजनेता और सरकारी कर्मचारी पहन सकते हैं।

16 अगस्त से 17 सितंबर के बीच पैदा हुए लोगों को रूबी से अत्‍यंत लाभ मिल सकता है। रूबी स्टोन छात्रों, स्टॉक ब्रोकर, भूवैज्ञानिक, इंजीनियरों, डॉक्टरों, न्यायाधीशों, वकीलों और नीति निर्माताओं को लाभ पहुंचाता है। माणिक धारण करने से इन्‍हें अपने करियर में सफलता मिल सकती है।

 

किस राशि का भाग्‍य रत्‍न है रूबी

 

सूर्य जिस तरह माणिक्‍य रत्‍न का स्‍वामी है, ठीक उसी तरह यह सिंह राशि का भी स्‍वामी है। इस प्रकार सिंह राशि के लोगों के लिए माणिक्‍य रत्‍न उनका भाग्‍य रत्‍न हुआ। सिंह राशि के लोगों को इस स्‍टोन को पहनने से अत्‍यंत लाभ मिल सकता है।

 

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किसे रूबी नहीं पहनना चाहिए

 

वृषभ लग्न, कन्या लग्न, मकर लग्न, कुम्भ लग्न, तुला लग्न, मकर लग्न और मीन लग्न के लोगों को माणिक्य धारण नहीं करना चाहिए।

वृष लग्न के लिए सूर्य चतुर्थ भाव का स्वामी है। सूर्य वृष लग्न के स्वामी शुक्र का शत्रु है इसलिए आपको माणिक धारण न करने की सलाह दी जाती है। मिथुन लग्न के लिए, सूर्य तीसरे घर का स्वामी है और इसलिए आपको इस रत्न को धारण करने से बचना चाहिए। आप सूर्य महादशा के दौरान रत्न तभी धारण कर सकते हैं जब आपकी जन्म कुंडली में सूर्य अपनी राशि में स्थित हो।

 

माणिक्‍य कितने रत्ती का पहनना चाहिए

 

रत्‍न ज्योतिषीय के अनुसार माणिक्‍य स्‍टोन कम से कम 1 कैरेट का ही पहनना चाहिए। इस रत्न को सोने या तांबे में पहनना चाहिए। 2 से 3 कैरेट का रत्न अच्छा होता है। इसे कम से कम 5 रत्ती का पहनना शुभ रहता है।

रूबी एक गर्म रत्न है और इसलिए यह पित्त को नियंत्रित करता है जो शरीर में अग्नि के रूप में कार्य करता है।

 

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रूबी स्‍टोन पहनने की विधि

 

सूर्य का रत्न माणिक्य सोने या तांबे की बनी अंगूठी में अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिए। अंगूठी को धारण करने से पहले उसे कच्चे दूध या गंगाजल में डुबो देना चाहिए। भगवान शिव या भगवान विष्णु को सफेद या लाल फूल अर्पित करें और अगरबत्ती जलाएं। अब सूर्य के मंत्र का 108 बार जाप करते हुए फूलों को अर्पित करें। सूर्य का मंत्र है - ओम ह्रीं ह्रीं ह्रीं सः सूर्याय नमः। माणिक्‍य स्‍टोन रविवार की सुबह या कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों के दौरान पहना जा सकता है।

 

माणिक्‍य रत्‍न के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

 

माणिक धारण करने के बाद शरीर में एनर्जी आती है। अगर आपको आंखों और रक्त संचार से संबंधित कोई समस्या है तो माणिक आपके लिए मददगार साबित हो सकता है।

इस स्‍टोन को पहनने से भावनात्मक और मानसिक परेशानियां दूर होती हैं और डिप्रेशन से भी मुक्ति मिलती है।

रुमेटिक समस्या, आत्मविश्वास की कमी, अस्थिर मन और हड्डियों से संबंधित समस्याओं जैसे रोगों से पीड़ित होने पर माणिक धारण करने की सलाह दी जाती है। इस रत्न को धारण करने के बाद त्वचा संबंधी समस्याएं कम हो सकती हैं। यदि कोई हड्डियों से संबंधित क्षय रोग से पीड़ित है, तो माणिक्य उसके लिए रूबी स्‍टोन उचित रहता है।

 

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