नवरात्र का आठवां दिन: जानिए, मां महागौरी और कन्या पूजन की विधि और महत्व

Indian Astrology | 01-Apr-2020

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नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं। देवी ने कड़ी तपस्या के बाद शिवजी को अपने पति के रूप में पाया था। शिवपुराण के अनुसार आठ साल की उम्र में ही मां महागौरी को अपने पूर्व जन्म की घटनाओं का आभास हो गया था इसलिए उन्होंने आठ वर्ष की उम्र में ही भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या शुरु कर दी थी। इसलिए अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि मां महागौरी की पूजा से पति और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन कन्या पूजन और दुर्गा सप्तशती के माध्यम से चरित्र का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।


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बेहद मोहक है मां महागौरी का स्वरूप

शंख और चंद्र के समान श्वेत वर्णधारी मां महागौरी का स्वरूप मन को मोह लेने वाला है। मां महागौरी को शिवा भी कहा जाता है। इनके चार हाथ हैं। दाहिना हाथ अभय मुद्रा में जबकि दूसरे हाथ में मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल है। बाएं ओर के ऊपर वाले हाथ में शिव का प्रतीक डमरू है जबकि नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है। मां अपनी शांत मुद्रा में शांति का प्रतीक श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं। मां महागौरी को गायन और संगीत बहुत पसंद है। ये वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं। श्रद्धा पूर्वक इनकी आराधना करने से पूर्व जन्म के सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

मां महागौरी की पूजा का महत्व

मां महागौरी की पूजा से पूर्व जन्म के सभी पापों से मुक्ति मिलती है। मां की आराधना करने से व्यक्ति के भीतर पल रहे कुत्सित और मलिन विचार समाप्त होते हैं। मां का ध्यान करने से व्यक्ति को आत्मिक ज्ञान की अनुभूति होती है। उसके भीतर श्रद्धा, निष्ठा और दया की भावना आती है। देवी भक्तों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। इनकी पूजा से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। मन को एकाग्र करने में मदद मिलती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। इसके अलावा मां विवाह में आ रही बाधाओं को भी दूर करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां महागौरी का राहु ग्रह पर नियंत्रण होता है इसलिए इनकी आराधना से राहु ग्रह से संबंधित सभी दोष दूर हो जाते हैं।


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पूजा में करें इन वस्तुओं का प्रयोग

मां महागौरी की पूजा में काले चने, हलवा, पूड़ी और सब्जी का भोग लगाया जाता है। आज के दिन नैवेद्य में माता को नारियल ज़रूर अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद फ़िर नैवेद्य रूप उस नारियल को ब्रह्मणों में दान किया जाता है। मान्यता है कि इसके फ़लस्वरूप उस व्यक्ति के पास किसी प्रकार का संताप नहीं आता। इस दिन कन्या पूजन और मां महागौरी को लाल चुनरी भेंट करने का भी विशेष महत्व है।  

पूजा के बाद करें कन्या पूजन

पूजा के बाद कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने और उनका पूजन करने से मां महागौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मां महागौरी अन्नपूर्णा स्वरूप हैं इसलिए इस दिन मान-सम्मान के साथ विधि-पूर्वक कन्याओं का पूजन व उन्हें दान करने से मां प्रसन्न होती हैं। इस दिन सभी शुभ कार्यों का फल प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करने से लक्ष्मी, विद्या, तेज, ज्ञान और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इससे विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश होता है। शास्त्रों के अनुसार इंद्र ने जब ब्रह्मा जी से देवी मां को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो उन्होंने कुंवारी पूजन करने की सलाह दी। इस दिन कुंवारी कन्याओं और एक कुमार को घर में बुलाकर उनके पांव धोकर विधिवत उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद उन्हें हलवा, पूड़ी, सब्ज़ी, फल का भोजन कराकर वस्त्र, आभूषण आदि भेंट किए जाते हैं।  

माता महागौरी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा में मां महागौरी की कई कथाएं मिलती हैं। इनमें से एक कथा के अनुसार एक बार भगवान भोलेनाथ द्वारा कहे गए एक वचन से पार्वती का मन आहत हो जाता है और पार्वती तपस्या में लीन हो जाती हैं। इसके बाद वर्षों तक कठोर तपस्या के बाद जब पार्वती नहीं लौटतीं तो भगवान शिव उनके पास पहुंचते हैं। वहां पहुंचकर वे पार्वती को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। पार्वती जी का मन अत्यंत ओजपूर्ण होता है। उनकी छटा चांदनी के समान श्वेत और कुंद के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती हैं। उनके वस्त्र, आभूषण और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी उन्हें गौरवर्ण का वरदान देते हैं और वे महागौरी कहलाती हैं।

एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी। वर्षों तक तपस्या करने के कारण उनका वर्ण काला पड़ जाता है। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके शरीर को गंगा के जल से धोते हैं जिसके बाद देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं। तभी से इनका नाम ‘गौरी’ पड़ जाता है।

मंत्र

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

प्रार्थना (श्लोक)

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां गौरी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बारंबार प्रणाम है। हे मां, मुझे सुख-समृद्धि प्रदान करें।

ध्यान

  • वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
  • सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
  • पूर्णन्दु निभाम् गौरी सोमचक्रस्थिताम् अष्टमम् महागौरी त्रिनेत्राम्।
  • वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
  • पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
  • मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
  • प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् त्रैलोक्य मोहनम्।
  • कमनीयां लावण्यां मृणालां चन्दन गन्धलिप्ताम्॥

स्तोत्र पाठ

सर्वसङ्कट हन्त्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।

ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदायनीम्।

डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

त्रैलोक्यमङ्गल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।

वददम् चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

मां महागौरी की आरती

  • जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
  • हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवास॥
  • चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
  • भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
  • हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
  • सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
  • बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
  • तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
  • शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
  • भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

मां महागोरी का पसंदीदा फूल

मां महागौरी को रात की रानी का फूल (Night Blooming Jasmine) बहुत पसंद है इसलिए उनकी पूजा करते समय उन्हें ये फूल ज़रूर अर्पित करें।

शुभ रंग

चैत्र नवरात्र के आठवें दिन के लिए नीला शुभ रंग है। नीले रंग का संबंधी आकाश से होता है जो कि प्रकृति के विस्तृत और असीम रूप का प्रतीक है। इस दिन इस रंग के वस्त्र धारण करके अपनी सोच का दायरा विस्तृत करें।


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