मृत्यु के समय ही क्यों किया जाता है गरुड़ पुराण का पाठ

Indian Astrology | 25-May-2020

Views: 732

मृत्यु एक ऐसा सच है जिससे न तो कोई बच सकता है और न ही कोई इसे झुठलाकर खुद को अमरता के भ्रम में रख सकता है। यह परम सत्य है कि मानव शरीर नश्वर है और जिसने भी इस नश्वर शरीर में जन्म लिया है उसे एक न एक दिन इस शरीर को त्यागना ही पड़ेगा। लेकिन ये बात जरूर है कि जहां कुछ लोग जन्म लेते ही मर जाते हैं वहीं कुछ लोग दीर्घायु जीवन पाते हैं, लेकिन इस लंबी उम्र का भी एक अंत निश्चित ही है। 

पुराणों के अनुसार यह कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस जीवन में अच्छे कर्म करता है उसे मरने के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है और जो लोग गल्त काम करते हैं और पूरी जिन्दगी बुराई का ही साथ देते हैं वह नर्क जाते हैं। वैसे तो यह भी एक सच है कि मरने के बाद आत्मा का क्या होता है, इस सवाल का जवाब अभी तक कोई ढूंढ़ नहीं पाया है। बस मान्यताओं को ही आधार बनाकर हम बातों को स्वीकारते और नकारते हैं। मान्यताओं के अनुसार मनुष्य की मृत्यु के बाद कुछ रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है, जिनका उद्देश्य आत्मा को बिना किसी परेशानी के उसके निर्धारित स्थान तक पहुंचाना होता है। गरुड़ पुराण का पाठ इन्हीं सब रिवाजों में से एक है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पक्षियों के राजा और भगवान विष्णु के वाहन हैं। इसी वजह से गरुड़ कश्यप ऋषि और उनकी दूसरी पत्नी विनता की संतान के रूप में जाने जाते हैं। वही  एक बार गरुड़ ने भगवान विष्णु से, प्राणियों की मृत्यु, यमलोक यात्रा, नरक-योनियों तथा सद्गति के बारे में अनेक गूढ़ और रहस्ययुक्त प्रश्न पूछे। इसके अलावा  उस समय भगवान विष्णु ने गरुड़ की जिज्ञासा शांत करते हुए इन प्रश्नों का उत्तर दिया था। वही गरुड़ के प्रश्न और भगवान विष्णु के उत्तर, इसी गरुड़ पुराण में संकलित किए गए हैं। 

सनातन धर्म में मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण सुनने का विधान है। गरुड़ पुराण में जिस प्रकार के नरक और गतियों के बारे में बताया गया है, क्या यह सत्य है यदि बात की जाए तो गरुड़ पुराण में व्यक्ति के कर्मों के आधार पर दंड स्वरुप मिलने वाले विभिन्न नरकों के बारे में बताया गया है। परन्तु ये प्रतीकात्मक हैं, वास्तविक नहीं हालांकि ये बात जरूर है कि उसी तरह के परिणाम वास्तविक जीवन में भुगतने पड़ने हैं और ये परिणाम वास्तविक तथा मानसिक होते हैं। 


अपनी कुंडली में सभी दोष की जानकारी पाएं कम्पलीट दोष रिपोर्ट में


बहुत से लोग इस बात से पूरी तरह बेखबर हैं कि आखिर मौत के बाद गरुड़ पुराण का पाठ क्यों किया जाता है। अगर आप इन्हीं लोगों की श्रेणी में हैं तो हम आपको इसका कारण बताते हैं, आप अगर गरुण पुराण की रचना को देखते है तो गरुण पुराण आपको साफ तौर पर दो भागों में बंटी हुई दिखाई देती है। इसके एक भाग में विष्णु के रुपों के बारें में विस्तृत वर्णन किया गया है तो वहीं दूसरे भाग में मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है इसका जिक्र किया गया है। 

गरुण पुराण में मृत्यु के बाद होने वाली क्रियाओं तथा श्राद्ध आदि के महत्व को भी इसी भाग में दिखाया गया है। और उन्हें सही तरीके से करने के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि अगर मौत के बाद गरुण पुराण पढ़ी जाए तो मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति और धरती के बंधन से मुक्ति मिलती है। परिवार में किसी की मौत के पश्चात गरुण पुराण का पाठ किया जाता है या किसी ब्राह्मण द्वारा करवाया जाता है। सामान्य तौर पर एक आम इंसान के दिल में जन्म और मृत्यु से जुड़े कई सवाल होते हैं जिनका जवाब गरुण पुराण में छिपा है। 

गरुण पुराण में लिखी बातों और मौत की सच्चाई जानने के बाद परिवार वालों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इतना ही इसके अलावा परिवार जन सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। ये बात तो हम अकसर सुनते आए हैं कि हमें अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल इसी जीवन में मिलता है लेकिन गरुण पुराण के अनुसार मौत के बाद आत्मा भी अपने सुकर्मो और कुकर्मों को जीती है।

गरुण पुराण के अंदर श्रीहरी के 24 अवतारों का ना सिर्फ जिक्र किया गया है बल्कि उनके जीवन को भी रूपित किया गया है। सूर्य-चन्द्र आदि ग्रहों के मंत्र, शिव-पार्वती के पूजन का महत्व, साथ ही सभी नौ शक्तियों से जुडी बातें भी बताई गयी हैं। गरुण पुराण का आधार पृथ्वी के पहले इंसान, मनु और ब्रह्मांड का उद्भव है। इसके अलावा गरुण पुराण शिव-पार्वती के संबंध, सूर्य मंत्र, सरस्वती, इन्द्र आदि का संकलन है।

किसी की मृत्यु होने पर शोकाकुल परिजनों के मन में जीवन और मरण को लेकर अलग-अलग आशंकाएं और प्रश्नों का जन्म होने लगता है। जिनके जवाब केवल और केवल गरुण पुराण में ही मिलते है। इसलिए किसी की मृत्यु के बाद गरुण पुराण का पाठ करवाया जाता है। इतना ही नहीं शंकाओं और प्रश्नों का समाधान होने पर परिवार जन सभी क्रियाओं से संतुष्ट होकर जीवन में आगे बढने की प्रेरणा पाते हैं। 


यह भी पढ़ें: ऑनलाइन पूजा के द्वारा करवाएं जन्मकुंडली में स्थित अशुभ ग्रहों की शांति


लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल भी नही की इस पुराण का पाठ किसी की मृत्यु के बाद ही किया जाना चाहिए, इसके अलावा कभी नही। "कहते हैं कि अगर एक झुठी या गलत बात को बार-बार बोला जाये तो वही सही और सच लगने लगती है।" गरुण पुराण के साथ भी कुछ ऐसा भी हुआ है। अब आप गरुण पुराण के बारे में इतना कुछ जान ही गए है कि गरुण पुराण को किसी जीवित व्यक्ति के रखने या सुनने से उसके जीवन में किसी प्रकार की अशुभ घटना घटने की संभावना है ही नही। बल्कि गरुण पुराण के रखने पढने या सुनने से किसी भी जीवित व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति ही होती है और उसके लिए स्वर्ग और मोक्ष के द्वार हमेशा के लिए खुल जाते है।

गरुड़ पुराण के अनुसार कौन सी चीजें व्यक्ति को सद्गति की ओर ले जाती हैं, तुलसी पत्र और कुश का प्रयोग व्यक्ति को मुक्ति की ओर ले जाता है। संस्कारों को शुद्ध रखने से और भक्ति से व्यक्ति के दुष्कर्म के प्रभाव समाप्त होते हैं तथा व्यक्ति मुक्ति तक पहुंच जाता है। इसके अलावा जल तथा दुग्ध का दान करना भी व्यक्ति के कल्याण में सहायक होता है। गुरु की कृपा से भी व्यक्ति के दंड शून्य होते हैं और व्यक्ति सद्गति की ओर जाता है।

क्या गरुड़ पुराण का पाठ केवल किसी की मृत्यु के समय ही करना चाहिए? क्या गरुड़ पुराण केवल भय पैदा करता ? गरुड़ पुराण का पाठ अगर भाव समझकर किया जाय तो सर्वोत्तम होता है, वही  इसका पाठ कभी भी कर सकते हैं। वैसे अमावस्या को इसका पाठ करना सबसे ज्यादा उत्तम होता है इसका भाव समझने पर यह बिलकुल भी भय पैदा नहीं करता है । वही गरुड़ पुराण के भाव को समझने के लिए इसके साथ गीता भी जरूर पढ़ें। 

गरुड़ पुराण को अगर सकारात्मक दृष्टि से देखा जाए तो यह मनुष्य को सत्कर्म की ओर ही प्रेरित करता है, यह दर्शाता है कि कैसे बुरे का फल बुरा ही होता है। इसलिए अच्छे कर्म करना चाहिए जिससे कि हमारे साथ सब कुछ अच्छा हो।


जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें !