कैसा होगा आपका लाइफ पार्टनर ? जानिए क्यों जरूरी है कुंडली मिलान

Indian Astrology | 31-Aug-2021

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हर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसकी शादीशुदा जिदंगी बेहद खूबसूरत हो। और अपने आने वाले जीवन के लिए सही जीवनसाथी चुन सके। लेकिन कई बार पार्टनर से स्वभाव विपरीत होने या विचारों के न मिलने से अक्सर वाद-विवाद की स्थिति रहती है, स्त्री और पुरुष दोनों में इस बात को लेकर दुविधा रहती है कि उनका होने वाला पार्टनर क्या उसके लिए उचित है?

ज्योतिष शास्त्र में जन्मपत्री के मिलान से विवाह तय किये जाते हैं । सबसे पहले स्त्री और पुरुष दोनों की जन्मकुंडलियों के आधार पर यह निर्णय लिया जाता है कि दोनों का विवाह हो सकता  हैं या नहीं ?

आप किसी व्यक्ति से शुरुआती मुलाकात में तय नहीं कर सकते कि उसका स्वभाव कैसा है और क्या जीवन भर के लिए आप एक-दूसरे के लिए सहीं हैं। इन्हीं सवालों के जवाब के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुंडली मिलान किया जाता हैं।

कुंडली मिलान, आपको सही जीवनसाथी चुनने व शादी के बाद एक सुखी दाम्पत्य जीवन व्यतीत करने में सहायता प्रदान करता है । साथ ही कुंडली मिलान से आप जीवन शादी के अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं जैसे गुण मिलान, नाड़ी दोष, मांगलिक दोष आदि के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ज्योतिषशास्त्र में कुंडली के सातवें घर को विवाह और जीवनसाथी का घर कहा जाता है। पुरुष की कुंडली का सप्तम भाव और शुक्र उसकी पत्नी से सम्बन्ध रखते हैं। वहीँ स्त्री कि कुंडली में सप्तम भाव और बृहस्पति से उसके पति का विचार किया जाता है।

सातवें भाव को देखकर यह अनुमान लगाया जाता है कि व्यक्ति का जीवनसाथी कैसा होगा। इस घर में जो ग्रह होता है या जिनकी उस घर पर दृष्टि होती है उसके अनुसार व्यक्ति का जीवनसाथी होता है। आइए जानते हैं, कैसा होगा आपका जीवनसाथी…

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क्या है कुंडली मिलान?

हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने ज्योतिष शास्त्र में शादी विवाह से सम्बंधित कुछ विशेष नियम बनाये, जिनके आधार पर किन जातकों का आपस में विवाह हो सकता है। तय किया जा सकता है।

हिन्दू संस्कृति में शादी केवल शारीरिक रूप ही नही बल्कि आत्मिक रूप से मिलन के रूप में माना जाता है। इसलिए जन्मपत्री मिलान और उसकी गणना के आधार पर ही विवाह तय किये जाते हैं।

कुंडली मिलना के आधार रिश्ते की अंतरंगता जैसे आध्यात्मिक, शारीरिक और भावनात्मक अनुकूलता के बारे में जानकारी मिलती है। किसी भी वैवाहिक रिश्ते के लिए ये सभी बातें अति आवश्यक होती हैं इसलिए कुंडली मिलान बेहद जरूरी है।

क्यों है कुंडली मिलान अतिआवश्यक -

हमारी प्रचलित परम्पराएँ वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं। इसलिये इसे ज्योतिष विज्ञान कहा जाता है। हमारे जीवन पर पूर्वजन्म और जन्म के समय नक्षत्रों का गहरा प्रभाव होता है।

इन ग्रह दशाओं के आधार पर हमारे स्वभाव, भाग्य और स्वास्थ्य आदि बातें जुड़ी होती हैं। इसलिए दोनों जातकों जिनका विवाह होने वाला है, क्या वो एक-दूसरे के लिए अच्छे जीवनसाथी होंगे?

ये सब बातें तय की जाती हैं। किसी व्यक्ति को देखकर हम यह तय नही कर सकते कि आने वाले जीवन में वो जीवनसाथी के रूप में उपयुक्त होगा या नहीं। इसलिए कुंडली मिलान की व्यवस्था हमारे प्राचीन ज्योतिषाचार्यों और ऋषियों ने की है।

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गुण मिलान-

गुण मिलान कुंडली मिलान के लिए सबसे पहला आधार है। इसके लिए आठ तरह के अष्टकूट और गुणों का मिलान किया जाता हैं। शादी में गुण मिलान बेहद आवश्यक होता है।

वैवाहिक संबंधों की अनुकूलता के परीक्षण के लिए ऋषि-मुनियों ने अनेक ग्रंथ की रचना की, जिनमें वशिष्ठ, नारद, गर्ग आदि की संहिताएं, मुहुर्तमार्तण्ड, मुहुर्तचिंतामणि और ये गुण है – वर्ण, वश्य, तारा, योनि, गृह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी ।

इन सब तरह के गुणों के मिलान की कुल गणना 36 होती है, जिनमे से कुछ तय सीमा तक मिलान के बाद ही शादी करने की मान्यता मिलती है। कम से कम 36 में से 18 अंक मिलान होना अति आवश्यक है इससे कम मिलान होने पर शादी सफल होने की संभावना बिलकुल कम होती है और ऐसे रिश्तों को ज्योतिष शास्त्र भी मान्यता नहीं देता।

वर-कन्या की राशियों अथवा नवमांशेशो की मैत्री तथा राशियों नवमांशेशियों की एकता द्वारा नाड़ी दोष के अलावा शेष सभी दोषों का परिहार हो जाता है। इन सभी दोषों में नाड़ी दोष प्रमुख है, जिसके परिहार के लिए आवश्यक है कि वर-कन्या की राशि एक और नक्षत्र भिन्न-भिन्न हों अथवा नक्षत्र एक ओर राशियां भिन्न हों।

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गुण विचार -

18 या इससे कम गुण :- ज्योतिष की गणना के अनुसार 18 या इससे कम गुण मिलने पर ज्यादातर विवाह के असफल होने की संभावना होती है, इसलिए इस तरह के मामलों में विवाह नहीं करना चाहिए।

18-24 गुण मिलने पर :- जनमपत्रियों के मिलन में यदि गुण 18-24 के बीच में मिल रहें हों तो विवाह किया जा सकता है लेकिन इसमें वैवाहिक जीवन में समस्याएँ आने की सम्भावना होती है । हालाँकि विवाह किया जा सकता है।

24-32 गुण मिलने पर :- अगर गुण मिलान में 24-32 गुण मिल रहे हों तो ऐसा वैवाहिक रिश्ता सफल होगा। ऐसे जातकों को जरूर विवाह करना चाहिए।

32 से 36 गुण मिलने पर : ज्योतिष के अनुसार इस तरह के विवाह बहुत ही शुभ माने जाते हैं। इनमें आपस में सामंजस्य बेजोड़ होता है ।वैवाहिक जीवन में ज्यादा समस्याएं उत्पन्न नहीं होती।

मांगलिक दोष विचार -

शास्त्रानुसार कुज या मंगल दोष दांपत्य जीवन के लिए विशेष रूप से अनिष्टकारी माना गया है। अगर कन्या की जन्म-कुण्डली में मंगल ग्रह लग्न अथवा चन्द्र से 1, 4, 7, 8, 12वें भाव में विराजमान हो, तो वर की आयु को खतरा होता है।

वर की जन्म-कुण्डली में यही स्थिति होने पर कन्या की आयु को खतरा होता है। मंगल की यह स्थिति पति-पत्नी के बीच वाद-विवाद और कलह का कारण भी बनती है।

ज्योतिष ग्रंथों में कहा भी गया है। ''न मांगली यस्य पश्यति जीवः'' अर्थात जन्म-कुण्डली में बृहस्पति की दृष्टि मंगल पर पड़ रही हो, अथवा बृहस्पति एवं मंगल की युति हो तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है।

इसके अतिरिक्त कुछ विशेष भावों में भी मंगल की स्थिति के कुज दोष का कुफल लगभग समाप्त हो जाता है। यह अत्यंत आवश्यक है कि कुजदोषी वर का विवाह कुजदोषी कन्या से ही किया जाये, इससे दोनों के कुजदोष समाप्त हो जाते हैं और उनका दांपत्य जीवन सुखी रहता है।

शादी के लिए किसी अच्छे विशेषज्ञ ज्योतिषी से ही Kundli Milan करवाएं। इसके लिए आपके पास नाम, जन्मस्थान, जन्मतिथि और जन्मसमय होना जरुरी है।

कुंडली के उचित अध्ययन और गुण मिलान के बाद ही ये तय किया जाये कि जातकों की शादी करवाई जाए या नहीं। हिन्दू धर्म में विवाह जीवन भर का रिश्ता है इसलिए विवाह सोच समझ कर ही किया जाना चाहिए, जो कि विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह के बाद ही होना चाहिए।