सफलता में आ रही है बाधा तो धारण करें पुखराज रत्न

Indian Astrology | 20-May-2020

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वैदिक ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह का प्रत्येक कुंडली में विशेष महत्व है| बृहस्पति एक लाभकारी और शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह है। कुंडली में बृहस्पति यानि गुरु पूर्व जन्म के कर्म, धर्म, दर्शन, ज्ञान और संतान सुख के संतुलन का कारक होते हैं। 

बृहस्पति के बलवान होने पर जातक का परिवार, समाज और हर क्षेत्र में प्रभाव रहता है, किसी कुंडली में बृहस्पति का बल, स्वभाव और स्थिति, कुंडली से मिलने वाले शुभ या अशुभ परिणामों पर बहुत प्रभाव डालती है। कुंडली में बृहस्पति का बल भिन्न भिन्न होता है जैसे किसी कुंडली में बृहस्पति बलवान होते हैं तो किसी में निर्बल जबकि किसी अन्य कुंडली में बृहस्पति का बल सामान्य हो सकता है। 

किसी कुंडली में बृहस्पति के बल को निर्धारित करने के लिय बहुत से तथ्यों का पूर्ण निरीक्षण आवश्यक है, विभिन्न कारणों के चलते यदि बृहस्पति किसी कुंडली में निर्बल रह जाते हैं तो ऐसी स्थिति में बृहस्पति उस कुंडली तथा जातक के लिए अपनी सामान्य और विशिष्ट विशेषताओं के साथ जुड़े फल देने में पूर्णतया सक्षम नहीं रह पाते जिसके कारण जातक को अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

ऐसी स्थिति में कुंडली में निर्बल बृहस्पति को ज्योतिष के कुछ उपायों के माध्यम से अतिरिक्त उर्जा प्रदान की जाती है जिससे बृहस्पति कुंडली में बलवान हो जायें तथा जातक को लाभ प्राप्त हो सकें। बृहस्पति को किसी कुंडली में अतिरिक्त उर्जा प्रदान करने के उपायों में से उत्तम उपाय है बृहस्पति का रत्न पीला पुखराज धारण करना जिसे धारण करने के पश्चात धारक को बृहस्पति के बलवान होने के कारण लाभ प्राप्त होने आरंभ हो जाते हैं।

पुखराज रत्न (Yellow Sapphire Gemstone)-

पुखराज गुरु गुणों वाला रत्न माना गया है| पुखराज पीला, लाल तथा सफेद रंगों में पाया जाता है| इसे दिव्य गुणों वाला रत्न भी माना जाता है| गुरु ग्रह की कृपा पाने के लिए पुखराज धारण किया जाता है। पुखराज ज्ञान व बुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। इसका बहुत ज़्यादा महत्व होता है क्योंकि यह जीवन में समृद्धि व खुशहाली लेकर आता है। इसी कारण इसकी बहुत ज़्यादा मांग भी है। 

वैसे तो दुनिया में विभिन्न रत्न उपलब्ध हैं और उन सबकी अपनी अलग-अलग विशेषता है। इन सभी कीमती रत्नों में एक कीमती रत्न है पुखराज। हालांकि प्रत्येक रत्न ज्ञान का प्रतीक होता है लेकिन सबके गुण अलग-अलग होते हैं। पुखराज जातक के जीवन में समृद्धि लाता है। यह एक ऐसा रत्न है जो जातक के भीतर रचनात्मकता शैली को बढ़ाता है और जीवन में सफलता के अनेक अवसर प्रदान करता है। 

इसके प्रभाव से व्यक्ति को बुद्धि व ज्ञान प्राप्त होता है जिससे उसे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है और व्यक्ति मज़बूत बन जाता है। जो लोग पुखराज धारण करते हैं वो जीवन के हर सुख को प्राप्त कर लेते हैं। अपने तीव्र परिणामों के कारण कुछ लोगों के लिए यह उलटा भी पड़ सकता है। 

इसलिए पीले पुखराज के रंग का चुनाव केवल अपने ज्योतिषी के परामर्श अनुसार ही करना चाहिए तथा अपनी इच्छा से ही किसी भी रंग का पुखराज धारण नहीं कर लेना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से ऐसा पुखराज लाभ की अपेक्षा हानि भी दे सकता है। पुखराज धारण करने से पहले इंडियन एस्ट्रोलॉजी आप सभी को किसी अनुभवी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह लेने व अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाने की सलाह देता है।

कैसे धारण करें पुखराज-

बिना ज्योतिष परामर्श के इसे बिल्कुल भी धारण न करें और इस बात की पुष्टि कर लें कि यह रत्न आपके लिए शुभ है या नहीं। किसी अच्छी व प्रतिष्ठित रत्नों की दुकान से ही पुखराज ख़रीदें, क्योंकि नकली पुखराज पहनने से अनुचित परिणाम भी प्राप्त हो सकते हैं। पुखराज को आप सोना या चांदी की धातु में बनवाकर धारण कर सकते हैं, पुखराज हमेशा सवा 5 रत्ती, सवा 7 रत्ती, सवा 9 रत्ती की मात्रा में धारण करना चाहिए।


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पुखराज रत्न को धारण करने की विधि-

पुखराज गुरुवार के दिन धारण करना चाहिए। धारण करने से पूर्व पीली वस्तुओं विशेषकर जो बृहस्पति से संबंधित हो उनका दान करना चाहिए। बृहस्पति से संबंधित कुछ वस्तुएं हैं केला, हल्दी, पीला चन्दन, पीले कपड़े आदि, पुखराज धारण करने से पहले इसकी विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। 

बिना ज्योतिषी की सलाह और कुंडली देखे बिना पुखराज या अन्य रत्न नहीं धारण करने चाहिए। पीला पुखराज रत्न का शुद्धिकरण तथा प्राण प्रतिष्ठा करवाने के पश्चात इस रत्न को धारण करना होता है। वैदिक ज्योतिष पीले पुखराज रत्न को गुरुवार सुबह गुरु ग्रह की होरा में धारण करने का परामर्श देता है। 

बुधवार की रात को अपने पीले पुखराज को गंगाजल अथवा कच्चे दूध से भरी कटोरी में रख दें तथा गुरुवार की प्रात: स्नान करने के पश्चात अपनी दैनिक प्रार्थना करें और उसके पश्चात अपने पीले पुखराज की अंगूठी को सामने रखकर बृहस्पति देव का ध्यान करें और बृहस्पति के मूल मंत्र या बीज मंत्र का 108 बार या 27 बार जाप करें, बृहस्पति देव से इस रत्न के माध्यम से शुभातिशुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें, तत्पश्चात पीले पुखराज की अंगूठी को साफ वस्त्र से पोंछ कर धारण कर लें। 

यदि आपने अपनी अंगूठी को कच्चे दूध में रखा हो तो इस पहले साफ पानी से धो लें तथा तत्पश्चात इसे साफ वस्त्र से पोंछ कर धारण कर लें। यहां पर यह बात ध्यान देने योग्य है कि पीला पुखराज रत्न को पहली बार धारण करते समय इसे गुरुवार प्रात: धारण किया जाता है जबकि एक बार धारण करने के पश्चात अधिकतर स्थितियों में फिर इसे जीवन भर धारण किया जाता है।


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पुखराज रत्न से होने वाले लाभ (Benefits of Wearing Yellow Sapphire)-

  • पुखराज के प्रभाव से व्यक्ति एकाग्र मन के साथ अपना कार्य करने में सक्षम होता है साथ ही उसकी निर्णय लेने की क्षमता भी बेहतर होती है। इस रत्न से जातकों के मन में धार्मिकता तथा सामाजिक कार्य में रुचि होने लगती है।
  • पुखराज के प्रभाव से मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक प्रभाव बढ़ता है। यह किसी भावनात्मक तौर पर टूटे हुए व्यक्ति को उभारने में मदद करता है। यह रत्न शिक्षा के क्षेत्र में भी सफलता प्रदान करवाता है।
  • पुखराज का मन, शरीर और स्वास्थ्य के विकास पर विशेष प्रभाव पड़ता है। यह व्यक्ति को लक्ष्यों को प्राप्त करने के योग्य बनाता है और इसके प्रभाव से ही व्यक्ति उसे हासिल करने के लिए ज़्यादा प्रयास करता है।
  • यह रत्न अविवाहित जातकों विशेषकर कन्याओं को विवाह सुख, दंपत्तियों को वैवाहिक व संतान सुख का आशीष देता है।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पुखराज भगवान गणेश का सहयोगी है और श्री गणेश अच्छे भाग्य के अग्रदूत हैं, ऐसे में पुखराज को धारण करने से धन-वैभव व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
  • पुखराज धारण करने से मान सम्मान तथा धन संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • पुखराज को घर या पैसे रखने की जगह पर रखने से ज़्यादा समृद्धि आती है। यह मन को शांति प्रदान करने में मदद करता है|
  • विवाह में आती रुकावटें तथा व्यापार में होता नुकसान से बचने के लिए भी पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है।
  • जिन जातकों को सीने की दर्द, श्वास, गला आदि रोगों से परेशानी है तो उन्हें पुखराज धारण करना चाहिए।
  • अल्सर, गठिया, दस्त, नपुंसकता, टीबी, हृदय, घुटना तथा जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए भी पुखराज का उपयोग किया जाता है।

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पुखराज रत्न से होने वाले नुकसान-

  • जिन लोगों का बृहस्पति कमजोर है, उनके जीवन के लिए पुखराज कई बार नुकसानदायक भी हो सकता है। इसके दुष्प्रभाव से जीवन साथी के साथ मतभेद हो सकते हैं और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो सकता है।
  • पुखराज को कभी भी अपना रंग नहीं बदलना चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो यह पहनने वालों के लिए कठिनाइयों का कारण हो सकता है।
  • यदि रत्न धारण करने वाले व्यक्ति के पुखराज पर सफेद धब्बे पड़ जाएं तो यह उसके जीवन के लिए घातक हो सकता है।
  • दूधक रत्न सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • क्षीण शक्ति वाले पुखराज रत्न के दुष्प्रभाव से चोट आदि लगने की संभावना रहती है।
  • टूटे हुए पुखराज के पहनने से चोरी की संभावना होती है|

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