यदि आपकी कुंडली में हैं ये योग, तो होगी लव मैरेज,

Indian Astrology | 18-Mar-2020

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प्रेम प्रत्येक व्यक्ति की जरूरत है, प्रेम हृदय की एक ऐसी अनुभूति है जो हमें जन्म से ही ईश्वर की ओर से उपहार स्वरूप प्राप्त होती है| प्रेम में एक-दूसरे के प्रति समर्पण की भावना छुपी है। युवक और युवती को एक-दूसरे के प्रति जो आकर्षित करती है, उस फीलिंग्स का नाम प्रेम है। आज के समय में युवा वर्ग यह जानना चाहता है कि उसका प्रेम विवाह होगा या नहीं, ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे ग्रह योगो का वर्णन है, जिसके कारण व्यक्ति प्रेम और प्रेम विवाह करता है, जीवन में प्रेम को पाने के लिए जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह का अच्छा होना बहुत ही जरूरी होता है, कुंडली में प्रेम सम्बन्धो की बात करें तो इसमें शुक्र, चंद्रमा और मंगल ग्रह की विशेष भूमिका रहती है, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शुक्र स्त्री कारक ग्रह है। पति-पत्नी, प्रेम संबंध, भोग विलास, आनंद आदि का कारक ग्रह भी शुक्र ही है। शुक्र अनुकूल रहे तो जीवन प्रेम से भर जाता है, जब जातक की कुंडली में शुक्र और मंगल का योग बन जाता है या इनका आपस में कोई संबंध होता है तो ऐसी स्थिति में जातक के जीवन में प्यार की बहार आ सकती है।

ज्‍योतिष शास्‍त्र में कुंडली के आधार पर ही किसी जातक का विवाह निर्भर करता है, इसी से पता चलता है, कि अरेंज मैरिज होगी या लव मैरिज, ये बात भी पूरी तरह से जन्‍मकुंडली में बैठे ग्रहों की स्थिति व चल रही दशा पर निर्भर करती है, कई लोग प्‍यार तो कर लेते हैं लेकिन अपने इस रिश्‍ते को शादी के बंधन में नहीं बांध पाते, बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जिनका रिलेशनशिप शादी तक पहुंच पाता है, ऐसा आपकी कुंडली में बैठे कुछ विशेष ग्रहों और भावों की स्थिति पर निर्भर करता है, कुंडली में पंचम और सप्तम के स्वामी यदि एक साथ आ जाएं तो यह स्थिति भी प्रेम जीवन के लिए सकारात्मक योग बनाती है और आपको अपना प्यार मिलने की संभावना प्रबल होती हैं। यदि शुक्र की दृष्टि पंचम पर पड़ रही हो या वह चंद्रमा को देख रहा हो तो ऐसी दशा में चुपके-चुपके प्यार बढ़ता है। पंचमेश और एकादशेश का एक साथ बैठना भी कुंडली में प्रबल प्रेम योग का निर्माण करता है| ज्योतिषशास्त्र में “शुक्र ग्रह” को प्रेम का कारक माना गया है। कुण्डली में लग्न, पंचम, सप्तम तथा एकादश भावों से शुक्र का सम्बन्ध होने पर व्यक्ति प्रेमी स्वभाव का होता है। प्रेम होना अलग बात है और प्रेम का विवाह में परिणत होना अलग बात है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार पंचम भाव प्रेम का भाव होता है और सप्तम भाव विवाह का। पंचम भाव का सम्बन्ध जब सप्तम भाव से होता है तब दो प्रेमी वैवाहिक सूत्र में बंधते हैं। नवम भाव से पंचम का शुभ सम्बन्ध होने पर भी दो प्रेमी पति पत्नी बनकर दाम्पत्य जीवन का सुख प्राप्त करते हैं।

लव मैरेज( Love marriage) के योग –

जन्मकुंडली में लग्न, पंचम, सप्तम भाव व इनके स्वामियों और शुक्र तथा चन्द्रमा जातक के वैवाहिक जीवन व प्रेम संबंधों को समान रूप से प्रभावित करते हैं। लग्न या लग्नेश का सप्तम और सप्तमेश का पंचम भाव व पंचमेश से किसी भी रूप में संबंध प्रेम संबंध की सूचना देता है। यह संबंध सफल होगा अथवा नही, इसकी सूचना ग्रह योगों की शुभ-अशुभ स्थिति देती है।

  • लग्नेश का पंचम भाव से संबंध हो और जन्मपत्रिका में पंचमेश-सप्तमेश का किसी भी रूप में संबंध हो। शुक्र, मंगल की युति शुक्र की राशि में हो,
  • लग्न त्रिकोण का संबंध प्रेम संबंधों का सूचक है। पंचम या सप्तम भाव में शुक्र सप्तमेश या पंचमेश के साथ हो।
  • जन्मकुंडली में सप्तमेश लग्नेश से कमजोर हो, यदि सप्तमेश अस्त हो अथवा नवांश में नीच राशि में हो तो जातक का विवाह अपने से निम्न कुल में होता है। इसके विपरीत लग्नेश से सप्तमेश बली हो, शुभ नवांश में हो तो जीवनसाथी उच्च कुल का होता है।
  • जातक की कुंडली में शुक्र और मंगल का योग हो, या इनका आपस में कोई संबंध हो तो ऐसी स्थिति में जातक के जीवन में प्यार की बहार आती है।
  • सप्तमेश और पंचमेश एक-दूसरे के नक्षत्र में हों तो भी प्रेम विवाह का योग बनता है।
  • पंचम और सप्तम भाव के स्वामी यदि पंचम या सप्तम भाव में एक साथ युति करें तो यह स्थिति भी प्रेम जीवन के लिए सकारात्मक योग बनाती है और जातक को उसका प्यार मिलने की संभावना प्रबल होती हैं।
  • यदि शुक्र की दृष्टि पंचम भाव पर पड़ रही हो या वह चंद्रमा को देख रहा हो तो ऐसी दशा में चुपके-चुपके प्यार बढ़ता है।
  • पंचमेश और एकादशेश का एक साथ बैठना भी कुंडली में प्रबल प्रेम योग का निर्माण करता है।
  • किसी जातक की जन्मपत्रिका में लग्न, पंचम, सप्तम भाव और इनके स्वामियों तथा शुक्र व चन्द्रमा जातक के वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को समान रूप से प्रभावित करते हैं|
  • पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव में हो और सप्तम भाव का स्वामी पंचम भाव में हों तो प्रेम विवाह के प्रबल योग बनते हैं
  • यदि राहु पंचम या सप्तम भाव में हो तो प्रेम विवाह की संभावना होती है, परन्तु यहाँ स्थित राहु अंतर जातीय प्रेम विवाह करवाता है,
  • यदि मंगल पंचम भाव में हो या सप्तम भाव में मेष राशि में मंगल हो तो भी प्रेम विवाह के योग बनते हैं,
  • सप्तमेश और पंचमेश एक-दूसरे के नक्षत्र पर हों तो भी प्रेम विवाह का योग बनता है।
  • जन्म कुंडली में विवाह कारक ग्रह पंचम भाव के साथ संबंध बनाता हो अथवा पंचम भाव का दूसरे, सातवें, और ग्याहरवें भाव से संबंध हो तो प्रेम विवाह होता है।
  • राहु और केतु में से किसी की भी दृष्टि शुक्र या सप्तमेश पर पड रही हो तो प्रेम विवाह के योग प्रबल होते हैं,

असफल Love marriage के योग-

यदि युवक और युवती की कुंडलियों में ये योग हों तो प्रेम विवाह नाकामयाब रहता है| दोनों की कुंडली में ग्रहों की ये position अच्छी नहीं मानी जाती|

  • पंचम भाव अथवा शुक्र पापक्रान्त हों अर्थात पाप ग्रहों के मध्य में हों तो प्रेम विवाह होने में बाधा आती है|
  • जन्म कुंडली में पंचमेश अथवा प्रेम विवाह कारक ग्रह शुक्र लग्न से छठे, आठवें, बारहवें हों तो प्रेम विवाह नहीं हो पाता अथवा विवाह के पश्चात परेशानियां आती हैं|
  • पंचमेश और सप्तमेश यदि लग्न और चन्द्र से छठे, आठवें या बारहवें भाव में बैठ जायें और शुभ ग्रहों से किसी भी तरह का दृष्टि युति सम्बंध नहीं बनाते हों तो प्रेमियों को अपने लव लाइफ का बलिदान करना पड़ता है|
  • एकादश भाव पापी ग्रहों के प्रभाव में होता है तब प्रेमियों का मिलन नहीं होता है|
  • यदि लड़के की कुंडली का शुक्र लड़की की कुंडली में राहू के साथ स्थित हो जाये तो लड़के के काम विकृति के कारण विवाह विच्छेद के योग बन सकते हैं|
  • लड़के की कुंडली का राहू यदि लड़की की कुंडली में शुक्र के साथ स्थित हो तो विवाह विच्छेद या दीर्घकालीन विवाद और विषाद के योग बनेंगे|

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