कुमार विश्वास - कोई दिवाना कहता है…

Rekha Kalpdev | 19-Apr-2019

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आधुनिक कवियों के झूरमूठ में कुमार विश्वास तारों से भरी रात में चंद्र के समान है। कुमार विश्वास कवि नहीं बल्कि चलता फिरता सम्मेलन है। कुमार आज के दौर के ऐसे कवि है जिन्हें सुनने के बाद आप झूमने पर मजबूर हो जायेंगे। एक से बढ़कर एक कविताओं से सबका मन मोहने वाले कुमार विश्वास आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। कुमार विश्वास ने हिन्दी भाषा को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया है। कुमार की कविताओं की दीवानगी का आलम यह है कि जब ये कहीं कवि सम्मेलन में जाते हैं तो युवा वर्ग की तालियों की गूंज माहौल को घंटों तक संगीतमय बनाए रखती है। कुमार एक कवि, एक गीतकार, एक अभिनेता, एक राजनेता, एक लेखक, एक स्वदेश की भावना को आगे बढ़ाने वाले, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनेता और हिन्दी भाषा को गूगल आफिस तक पहुंचाने का कार्य करने वाले एकमात्र कवि हैं. जिनके अथक प्रयास से हिन्दी को एक बार फिर विश्व में एक नई पहचान मिली है।


कल तक कविताओं को बीते हुए कल, बुजुर्गों और निराश लोगों का शौक समझा जाता था, आज के युवावर्ग को कविताओं से जोड़ने का कार्य कुमार ने किया है। आज के समय के सबसे चर्चित, फेमस और पसंदीदा कवि कुमार है। कुमार जब देशभक्ति के जज्बे से भरी कविता करते हैं तो कहते हैं कि -

दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला

बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला

शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो

होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

होठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

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फेसबुक हो, ट्विटर हो या फिर इंस्टाग्राम हो, सोशल मिडिया पर इनके फोलोर्स का परिवार बहुत बड़ा है। एक छोटे से कस्बे से निकल कर कुमार की कविताओं की रोशनी आज पूरे विश्व को रोशन कर रही है। देश हो या विदेश हों जहां भी कुमार विश्वास कविता पाठ कर रहे होते हैं, वहां के केंद्र होते हैं और सम्मेलन की वाह वाही इनके नाम हो जाती है। विश्व के कोने कोने में इन्होंने कविता पाठ कर श्रोताओं को आत्मविभोर किया है। अमेरिका, आबुधाबी, दुबई, सिंगापुर, ब्रिटेन और नेपाल इनमें से कुछ देश हैं जहां कुमार की कविताओं का जादू सिर चढ़कर बोलता है। असंख्य कविताओं के मोतियों से कुमार का कविता कोश भरा हुआ है। इसमें सभी कविताएं एक से बढ़कर एक हैं, इनमें से कौन सी सबसे अच्छी है, यह बताना कुमार के लिए भी कठिन होगा। अपने समय के प्रसिद्ध कवि नीरज जी ने भी इन्हें आधुनिक निशा नियामक की उपमा से संबोधित किया है। इनकी कविताओं में रहस्यवाद के दर्शन भी किए जा सकते हैं। इस संदर्भ में एक कविता के कुछ अंश यहां दिए जा रहे हैं-

एक स्थान पर राधा की स्थिति का वर्णन करते हुए कुमार ने लिखा कि –

न द्वारका में मिलें बिराजे,

बिरज की गलियों में भी नहीं हो।

न योगियों के हो ध्यान में तुम,

अहम जड़े ज्ञान में नहीं हो।

इनकी इस कविता में दर्शन की झलक साफ-साफ देखी जा सकती है। इनकी कविता का एक अन्य रंग यहां देखिए- जीवन-मरण के जीवन चक्र पर इनकी यह कविता - कर्म फल को एक नये अंदाज में बंया करती हैं-

रूह जिस्म का ठौर ठिकाना चलता रहता है

जीना मरना खोना पाना चलता रहता है

सुख दुख वाली चादर घटती बढती रहती है

मौला तेरा ताना वाना चलता रहता है

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एक समय था जब कविता और शायरी को असफल और निराश लोगों की निशानी समझा जाता था। इस भ्रम से बाहर लाने का कार्य कुमार ने किया। तब बड़े शहरों में हाई प्रोफाईल लोग महंगे टिकट लेकर कविताएं सुनते थे। कविता पाठ सुनने का उनका उद्देश्य कविता में छूपा भाव नहीं होता था, बल्कि एकमात्र उद्देश्य अपनी उपस्थिति दर्ज कराना होता था। हालांकि उस समय भी एक ऐसा वर्ग था, जो छोटे शहरों के श्रोताओं का था, जो कविताओं को मन से सुनता था। कुमार की कविताओं को समझने, कविताओं में छूपे भाव में डूबने के लिए आपको संगीत, काव्य, गद्य, साहित्य और संगीत की जानकारी होना लाजमी नहीं है। बस आपमें महसूस करने की समझ होनी चाहिए।

कुमार की कविताओं में दर्शन शास्त्र की गहराई, धर्म, आध्यात्म और सभी एक साथ विद्यमान होता है। बहुत कठिन समझे जाने वाले दर्शन शास्त्र की सरल अभिव्यक्ति कुमार की कविताओं में देखी जा सकती है। यदि कुमार विश्वास की कविताओं को युवावर्ग की जुबां कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! यह गीत गाकर कुमार विश्वास ने सारे जगत का ह्रदय जीत लिया है। जहां जाते हैं वहां इनसे इस गीत का पाठ करने का आग्रह अवश्य किया जाता हैं।


यह कुमार की कविताओं का निरालापन है जो इनके अतिरिक्त अन्य कहीं नहीं मिलेगा। इनकी कविताएं में मातृभूमि की सौंधी सौंधी खूशबू, आजादी के वीरों के बलिदान के रक्त का ओज और सौंदर्य रस से युक्त कविताओं में दर्शन शास्त्र की आध्यात्मिकता के रंग देखे जा सकते है। इन्हें सुनना ठीक वैसा ही है जैसे त्रिवेणी के घाट पर बैठकर बहते जल की शीतलता का अनुभव करना। या यह कहिए कि यह प्रयाग में कुम्भ स्नान करने के समान है।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़कर, साहित्य में अपनी रुचि की पढ़ाई शुरु की। हिन्दी साहित्य में पी।एच।डी करने वाले कुमार ने हिन्दी भाषा को गौर के स्तर तक पहुंचाया है। बालीवुड के लिए कभी गीत भी लिखें, कभी राजनीति में भविष्य भी आजमाया, असफल भी हुए और विवादों से बचने के लिए दूरी भी बना ली। हिन्दी साहित्य जगत में अनेक सम्मानों, पुरस्कारों और उपलब्धियों से कुमार विश्वास का जीवन सजा हुआ है।


कुमार विश्वास को इतनी लोकप्रियता क्यों हासिल हुई। इसका विश्लेषण आज हम इनकी कुंडली से करने जा रहे हैं-

10 फरवरी 1970, 02-00, पिलखुआ, उत्तर प्रदेश

कुमार विश्वास की जन्म वृश्चिक लग्न और मीन राशि में हुआ। वर्तमान में इनकी सूर्य में बुध की दशा प्रभावी है। सूर्य की महादशा 2020 तक रहेगी। जन्मपत्री में पंचमेश गुरु का द्वादश भाव में स्थित है। लग्न, पंचम और नवम भाव, इनके भावेशों का आपस में संबंध होना उच्च शिक्षा देता है। यह उत्तम श्रेणी का राजयोग बनता है। इस कुंडली में लग्नेश मंगल नवमेश चंद्र के साथ पंचम भाव में स्थित है। इस योग ने इन्हें हिन्दी साहित्य में शोध स्तर की शिक्षा दी। द्वितीयेश गुरु विदेश भाव में है। तीसरे भाव को तीसरे भाव का स्वामी दॄष्टि देकर बल दे रहा है।

दशमेश सूर्य और एकादशेश बुध दोनों की युति मिडिया, कम्यूनिकेशन, सोशल जगत के भाव में है। इस योग के फलस्वरुप इनका कर्म क्षेत्र और आय क्षेत्र सोशल जगत और कम्यूनिकेशन से संबंधित कर रहा है। पंचम भाव में चंद्र मंगल की युति ने श्रंगार रस की कविताएं लिखने की कला दी। चतुर्थ-दशम भाव का राहु/केतु अक्ष पर होना और सप्तमेश का चतुर्थ में होने ने विवाह के पश्चात यश, सफलता देकर इनका भाग्योदय किया। छ्ठे भाव में नीच के शनि ने संघर्ष और आंदोलन का भाग भी इन्हें बनाया।

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उत्तम राजयोगों के अतिरिक्त कुंडली में चंद्रमा से आठवें भाव में गुरु स्थिति है, इस प्रकार यहां शकट योग बन रहा है। सूर्य से द्वितीय भाव में चंद्र नहीं हैं बल्कि यहां शनि हैं, इस प्रकार यहां सुनफा योग निर्मित हो रहा है। चंद्रमा से बारहवें में सूर्य का ना होना और अन्य ग्रह का होना अनफा योग बना रहा है।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली का दूसरा भाव वाणी भाव है। वाकशक्ति, गायन, संवादन आदि विषय इस भाव से देखे जाते है। तीसरा भाव सोशल मिडिया और कम्यूनिकेशन का भाव है। यह भाव रुचियों, कलाओं और मनपसंद विषयों का हैं। चौथे भाव वैसे तो ह्रदय का भाव है, माध्यमिक शिक्षा के अतिरिक्त इस भाव से ह्रदय को सकूं देने वाले विषयों का आकलन किया जाता है। अब बात करें यदि हम पंचम की तो वह उच्च शिक्षा के साथ साथ प्रेम, काव्य, मनोरंजन और मन में छूपी भावनाओं का है। इस भाव को ह्रद्य की वाणी भी कहा जा सकता है। तीसरे भाव को लेखनी का भाव भी कहा जाता है, पंचम भाव तीसरे से तीसरा होने के कारण साहित्य और रचनाओं का भाव है।

चतुर्थ भाव में शुक्र की अच्छी स्थिति संगीत, नृत्य, अभिनय, सिनेमा व शुक्र से संबंधित क्षेत्रों में सफलता देती है। चतुर्थ भावगत शुक्र की दृष्टि भी दशम भाव पर होती है, जिसका संबंध आजीविका से है ही। लेकिन दशम भाव मे शुक्र का दिकबल शून्य होने से उतना अच्छा परिणाम नही मिलता है जितना चतुर्थ के शुक्र का मिलता है क्योंकि चतुर्थ में शुक्र दिकबली हो जाता है। इनकी कुंडली में यह स्पष्ट देखा जा सकता है। चंद्रमा से ललित कलाओं में रुचि जानी जा सकती है। पंचम में चंद्रमा को मंगल का साथ मिलने से इन्हें कला जगत, ललित कलाओं में सम्मान, ख्याति और धन मिला। दूसरे और तीसरे भाव का सुस्थिर होना गाने और लेखन दोनों का गुण देता है। तृतीय भाव भावेश का संबंध लाभ या धन भाव या लाभेश या धनेश से बने तो व्यक्ति अपनी कला से धन भी कमा सकता है। यहीं इनके साथ हुआ, इन्होंने अपनी काव्य कौशल की खूशबू संपूर्ण विश्व को महका रही है।