शनि की कृपा दृष्टि पाने के लिए करें ये उपाय

Future Point | 11-Jun-2019

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ऐसा माना जाता है की शनिदेव की अशुभ दृष्टि से व्यक्ति के जीवन में कई कठिनाईयां आती है और बने बनाए कार्य बिगड़ने लगते हैं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वैसे तो हर ग्रह की महादशा और अंतर्दशा सभी राशियों पर चलती रहती है जिससे व्यक्ति के जीवन में उच्छे व बुरे दोनों परिणाम देखने को मिलते हैं परन्तु लोगों को अगर किसी ग्रह की महादशा से सबसे ज्यादा डर लगता है तो वह है शनि की महादशा, इसके कारण कई लोग परेशान हो जाते हैं की आखिर क्या किया जाए, लेकिन इससे भी ज्यादा मुश्किल का समय होता है उनके लिए जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह गलत जगह स्थापित हो, ऐसे में व्यक्ति को जीवन भर परेशानियों का सामना करना पड़ता है इन्हीं परेशानियों का हल करने के उपाय ज्योतिष में बताए गए हैं।

शनि देव को प्रसन्न करने के कुछ उपाय -

  • प्रत्येक शनिवार के दिन बंदरो को भुने हुए चने खिलाने चाहिए इससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है, इसके अलावा मीठी रोटी में तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलाने भी से व्यक्ति पर शनि देव प्रसन्न होते हैं और इसका अच्छा प्रभाव मिलता है।
  • प्रति दिन शनि देव की पूजा करने और प्रति दिन महा मृत्यंजय मन्त्र का जाप तथा ‘ॐ नम: शिवाय का जाप करने से शनि के दुष्प्रभावों से आपको मुक्ति मिलेगी और आपका जीवन बहुत सुखी व्यतीत होगा।
  • शनि के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए घर के किसी भी कोने में जहां अंधेरा हो वहां पर कटोरी में सरसों का तेल भरके रखें और उसमें तांबें का एक सिक्का डाल दें, ऐसा करने से शनि का बुरा प्रभाव नही पड़ता है।
  • यदि किसी व्यक्ति पर शनि की ढैया चल रही हो तो उसे शुक्रवार की रात में 800 ग्राम तिल भिगो देने चाहिए और शनिवार की सुबह ही उसे पीसकर उसमें गुड़ मिल कर 8 लड्डू बना लें और उन लड्डुओं को काले घोड़े को खिला देने चाहिए, 8 शनिवार तक ऐसा करने से व्यक्ति को शनि के दोषों से मुक्ति मिल जाएगी।
  • काली गाय की सेवा करने से शनि का दुष्प्रभाव दूर हो जाता है और प्रति दिन ऐसा करने से सदैव के लिए आप पर शनिदेव की कृपा बनी रहेगी, इसके लिए सबसे पहले काली गाय को पहली रोटी खिलाएं व उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं, फिर सींग में कलावा बांधने के बाद उन्हें मोतीचूर का लड्डू खिलाएं और इसके बाद उनके चरण स्पर्श करने चाहिए।
  • प्रत्येक शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करें व वट या पीपल के पेड़ पर जल या दूध चढ़ाएं इसके पश्चात् पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न हो जाते हैं और आप पर उनकी कृपा सदैव रहती है।
  • शनिवार के दिन अपने हाथ के नाप का 29 हाथ का काला लंबा धागा लें और उसे मसलकर अपने गले में पहन लें ऐसा करने से आप पर शनि का प्रभाव अच्छा होगा।
  • यदि किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़े साती की बुरी दशा चल रही हो तो उसे शनिवार के दिन शाम को पीपल के पेड़ में मीठा जल चढ़ाना चाहिए और सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और शनिदेव की आरती करके धूप व अगरबत्ती जलाना चाहिए और शनिदेव को काला तिल चढ़ाना चाहिए उसके बाद वहीं बैठकर हनुमान, भैरव, शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए और पाठ करने के बाद पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए।
  • यदि आप मन मुताबिक नौकरी पाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको शनिवार के दिन तिल का दान करना चाहिए क्योंकि काले तिल का दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं अतः इस उपाय को करने से आपकी सारी मुश्किलें जल्द दूर होने लगती है।

शनि की कृपा दृष्टि पाने के लिए धारण करें रुद्राक्ष -

  • रोजगार की समस्या निवारण के लिए दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.यह रुद्राक्ष को शनिवार के दिन लाल धागे में गले में धारण करना चाहिए, यदि आप इसे एक साथ 3 दस मुखी रुद्राक्ष धारण करते हैं तो अधिक फायदेमंद होगा।
  • यदि आपको स्वास्थ्य की समस्या हो तो इसके लिए शनिवार के दिन गले में 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करनी चाहिए।
  • यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैया हो तो शनि की साढ़े साती या ढैय्या में मिलने वाले कष्टों को दूर करने लिए गले में पांच मुखी रुद्राक्ष की माला धारण करनी चाहिए और धारण करने के पहले इसी माला से शनि और शिव जी का मंत्र जाप करना चाहिए।

रुद्राक्ष को किस प्रकार धारण करना चाहिए-

  • रुद्राक्ष को कलाई, गला और हृदय पर धारण किया जाना चाहिए।
  • परन्तु इसे गले में धारण करना सर्वोत्तम होता है इसे कलाई में 12, गले में 36 और ह्रदय पर 108 दानों को धारण करना चाहिए.
  • हृदय तक लाल धागे में एक दाना रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
  • सावन माह में सोमवार के दिन या शिवरात्री के दिन रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम होता है।
  • रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे शिव जी को समर्पित करना चाहिए।
  • रुद्राक्ष माला पर मंत्र जाप करना चाहिए।
  • जो भी व्यक्ति रुद्राक्ष धारण कर रहा है उसे सात्विक रहना चाहिए क्योंकि आचरण शुद्ध न रखने पर रुद्राक्ष लाभ नहीं देता है।