बेहतरीन लाभ प्राप्ति के लिए इन धातुओं में धारण करें रत्नों को

Future Point | 13-Jun-2019

Views: 238

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नव ग्रहों के नव रत्नों में प्रत्येक रत्न किसी खास धातु के लिए ही बना होता है, यदि किसी रत्न को गलत धातु में बनवा कर धारण कर लिया जाए, तो या तो उस रत्न का कोई प्रभाव नहीं होता है या फिर कई बार वह रत्न गलत प्रभाव भी छोड़ जाता है.

इसके अलावा सभी धातुओं का भी अपना एक खास प्रभाव होता है, शास्त्रों के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि जब कोई धातु किसी खास रत्न के साथ मिला दी जाए तो इसका प्रभाव और भी ज्यादा बढ़ जाता है, यही कारण है कि रत्न को किसी विशेष धातु से बनी अंगूठी या लॉकेट में ही धारण करने की सलाह दी जाती है, ऐसे में ये जानकारी भी आवश्यक है कि किस रत्न के लिए कौन से धातु का प्रयोग करना अनिवार्य है, क्योंकि जातक की कुंडली किस ग्रह के बुरे प्रभाव को कम करना चाहती है, और पहनी हुई धातु उसके लिए काम आएगी या नहीं, इसके लिए विशेषज्ञ ज्योतिष सलाह अनुसार ही रत्न को धारण करना चाहिए।

सोने की धातु में इन रत्नों को धारण करना लाभप्रद होता है-

नीलम रत्न :

नीलम रत्न सबसे शक्‍तिशाली और क्रूर कहे जाने वाले शनि ग्रह का रत्‍न माना जाता है, अतः व्यक्ति की कुंडली में शनि को बली करने के लिए नीलम रत्‍न धारण किया जाता है, नीलम रत्‍न को विशेष सोने और इसके अलावा पंचधातु या स्‍टील की अंगूठी में जड़वा कर धारण करना चाहिए, नीलम रत्‍न को कम से कम चार रत्ती का ही धारण करना ही चाहिए इसे आप अंगूठी या लॉकेट में जड़वा कर पहन सकते हैं।


मा‍णिक्‍य रत्न :

माणिक्‍य रत्न को अंग्रेजी में रूबी भी कहा जाता है और सूर्य का यह रत्‍न धारण करने पर व्यक्ति को सफलता की ऊंचाईयों तक पहुंचा सकता है, माणिक्य को सोने की अंगूठी में जड़वा कर रविवार, सोमवार या गुरुवार के दिन धारण करना चाहिए, माणिक्य पांच रत्ती का पहनना लाभप्रद होता है।


पीला पुखराज रत्न :

पीला पुखराज देवताओं के गुरु बृहस्‍पति का रत्‍न माना जाता है, अतः बृहस्‍पति के शुभ फल को प्राप्‍त करने के लिए पुखराज रत्‍न को धारण किया जाता है, पुखराज रत्‍न को सोने की धातु में धारण करना अत्यधिक शुभ रहता है।


मूंगा रत्‍न :

मूंगा को मंगल का रत्न माना जाता है, मूंगा रत्‍न कमजोर और डरपोक व्यक्तियों के लिए किसी वरदान से कम नही होताहै. मूंगा रत्‍न को सोने की अंगूठी में धारण करना शुभ रहता है और सोने के अलावा चांदी या तांबे की धातु में भी इसे धारण किया जा सकता है, कम से कम 6 रत्ती का मूंगा धारण करना लाभप्रद होता है।


ओपल रत्‍न :

वैसे तो शुक्र का रत्‍न डायमंड होता है लेकिन हर व्यक्ति डायमंड नहीं खरीद सकता है इसलिए डायमंड के स्‍थान पर शुक्र के लिए ओपल रत्‍न पहनने की सलाह दी जाती है, ओपल रत्न को सोने की धातु में जड़वा कर धारण करना बेहतर होता है और यदि सोने में संभव ना हो तो चांदी या व्‍हाईट गोल्‍ड में भी ओपल रत्‍न को जड़वा कर धारण किया जा सकता है।


चांदी की धातु में इन रत्नों को धारण करना लाभप्रद होता है -

पन्‍ना रत्‍न :

पन्‍ना रत्‍न को बुध का रत्न माना जाता है, अतः जो भी व्यक्ति पन्ना रत्‍न को धारण करता है उसे बुद्धि के साथ-साथ सेहत की भी प्राप्‍ति होती है, पन्‍ना रत्‍न चांदी की धातु में जड़वा कर धारण करना सर्वोत्तम रहता है परन्तु इसे सोने में भी जड़वा कर धारण किया जा सकता है, लेकिन चांदी की धातु में पन्‍ना सबसे ज्‍यादा लाभ देता है, पन्‍ना रत्न कम से कम तीन रत्ती का धारण करना लाभप्रद होता है।


मोती रत्न :

मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है जोकि मन को शीतलता प्रदान करता है, चंद्रमा मन और मस्तिष्‍क का कारक होता है और इसलिए इस रत्‍न को धारण करने से चंचल मन को भी नियंत्रित किया जा सकता है, मोती रत्‍न को केवल चांदी की धातु में जड़वा कर ही धारण करना चाहिए, 2, 4, 6 या 11 रत्ती का मोती पहनना लाभप्रद होता है।


लहसुनिया रत्न :

लहसुनिया को केतु का रत्न माना जाता है, लहसुनिया रत्न व्यक्ति के जीवन की परेशानियों को दूर कर सकता है, केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए लहसुनिया रत्‍न धारण किया जाता है, चांदी की धातु में जड़वा कर लहसुनिया धारण करना शुभ रहता है और इसे शनिवार के दिन ही धारण करना चाहिए।


गोमेद रत्न :

गोमेद को राहु का रत्न माना जाता है यह रत्न व्‍यापारियों के लिए बहुत लाभप्रद होता है, और स्‍टॉक मार्केट से जुड़े व्यक्तियों को भी गोमेद लाभ देता है, गोमेद रत्‍न को चांदी या अष्‍टधातु में धारण करना शुभ रहता है, शाम के समय विधि अनुसार राहू की उपासना कर इस रत्‍न की अंगूठी को मध्‍यमा अंगुली में धारण करना चाहिए, गोमेद कम से कम 6 रत्ती का धारण करना लाभप्रद होता है।