ये तेरा घर ये मेरा घर - ज्योतिषीय अध्ययन

Rekha Kalpdev | 30-May-2019

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धन सेविंग कर अपना घर बनाने का सपना सभी देखते है। हालांकि ऐसे बहुत कम लोग हैं जो अपने जीवनकाल में अपनी इच्छाओं के अनुरुप घर खरीदने में सफल हो पाते हैं। यह भी देखने में आया है कि कुछ लोग अपना घर खरीदने के लिए जीवन भर संघर्ष करते हैं परन्तु उन्हें सफलता नहीं हो पाती हैं। इसके विपरीत कुछ ऐसे भी लोग है जिन्हें अपना घर लेने के लिए कोई मेहनत नहीं करनी होती है, और उन्हें अपने माता-पिता या पूर्वजों की संपत्ति प्राप्त हो जाती है। कुछ ऐसे भी लोग है जो मेहनत की ही कमाई से एक से अधिक घर लेने में सफल होते है।

बहुत से लोग संपत्ति के दीवाने हैं यह आजकल स्टेटस सिंबल भी बन गया है। भूमि, भूखंड, घर, कार, गहने आदि के रुप में एक व्यक्ति बड़ी मात्रा में संपत्ति एकत्रित कर अपने परिवार के भविष्य को काफी हद तक सुरक्षित कर सकता है। अधिक मात्रा में संपत्ति एकत्रित करने का उद्देश्य बुरे समय या वित्तीय संकट में, कोई व्यक्ति अपने ऋण और बिलों का भुगतान करना होता है। जरुरत पड़ने पर वह व्यक्ति अपनी कुछ संपत्तियां बेच सकता है। परन्तु संपत्ति बेचना भी इतना सहज नहीं है, इससे अनेक जोखिम जुड़े हुए होते हैं जैसे- अवैध सौदों में फंसना, दोषपूर्ण या फेक खरीद का शिकार बनना, सौदों में गलत सूचनाएं देना। यदि कोई व्यक्ति जीवन में संपत्ति खरीदने या बेचने का कार्य करते समय विशेष सावधानी का प्रयोग करने के साथ साथ किसी योग्य ज्योतिषी से अपनी कुंडली का अध्ययन भी कराता है तो वह ऐसी परेशानियों से बच सकता है। एक अपना घर हों ऐसा सपना हर व्यक्ति देखता है। अपने भविष्य को सुरक्षित रखने, सफल जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में अपने घर की भूमिका सदैव से अहम रही है। सारे जीवन की कमाई देने के बाद मध्यम परिवार के किसी व्यक्ति का अपने घर का सपना पूरा होता हैं ऐसे में यदि वह व्यक्ति नुकसान के सौदे में फंस जाता है। तो उसे दु:ख और पछतावा दोनों होता है। किसी भी व्यक्ति को जीवन में अपना घर मिल पाएगा या वह व्यक्ति अपना घर बना पाएगा या नहीं, इसके लिए निम्न ज्योतिषीय योगों का ध्यान रखा जाता है।

किसी व्यक्ति की संपत्ति का विश्लेषण करने के लिए कुंडली के चतुर्थ भाव का अध्ययन किया जाता है। चतुर्थ भाव अचल और चल संपत्तियों का मुख्य भाव है। इसी भाव से संपत्ति की खरीद और बिक्री दोनों को देखा जा सकता है। पाराशर होरा शास्त्र को वैदिक ज्योतिष की भागवत गीता माना जाता है इस शास्त्र में ऐसे कई योग है जो घर खरीदने के विषय में बताते है। चौथा भाव संपत्ति, मन की शांति, माँ, गृह जीवन, स्व-संप्रेषण, पैतृक गुण, सामान्य खुशी और कुछ अन्य विषयों का भाव है। इसके साथ ही यह मुख्य रुप से संपत्ति का भाव भी है।

• यदि चतुर्थ भाव का स्वामी लग्न स्वामी के साथ हो और आय भाव हो तो व्यक्ति के पास कई घर हो सकते हैं।

• यदि पराक्रम भाव में बुध स्थित हो और चतुर्थ भाव का स्वामी भी सुस्थिर हो तो व्यक्ति सुंदर घर का निर्माण कराता है।

• यदि चतुर्थ भाव का स्वामी स्व-नवांश में हो या उच्च राशि का हो तो जातक को भूमि, वाहन, गृह आदि का स्वामित्व प्राप्त होता है।

• जो ग्रह चतुर्थ भाव में स्थित हों उन ग्रहों के पास भी संपत्ति देने की शक्ति होती है।

• यदि चतुर्थ भाव का स्वामी मित्रराशि में स्थित हो, नवांश या लग्न दोनों कुंड्लियों में हो तो घर के योगों में यह शुभ योग है।

• त्रिकोण भाव में नवमेश का होना और चतुर्थेश का अपने मित्र की राशि में होना एक अच्छा घर दे सकता है।

• यदि चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल या शनि या शुक्र से युक्त हो तो भी जातक को अपना घर प्राप्त हो सकता है।

• घर खरीदने के लिए मंगल, शुक्र, बृहस्पति की दशा अवधि अनुकूल होती है।

गृह, भूमि, संपत्ति के लिए निम्न ग्रहों को देखा जाता हैं-

• मंगल - अचल संपत्ति का कारक ग्रह मंगल है। इसका शुभ प्रभाव चतुर्थ भाव चतुर्थेश पर होना एक अच्छे घर का संकेत देता है।

• शनि - शनि ग्रह है जो भूमि, पुराने घर यानी पुनर्खरीद वाला घर देता है। इसके अलावा शनि गोचर में जब चतुर्थ भाव को सक्रिय करता है तब घर के निर्माण कार्य पूर्ण होते है।

• शुक्र - शुक्र का बली अवस्था में चतुर्थ / चतुर्थेश को प्रभावित करना एक भव्य घर होने का सूचक है।

• 1, 2, 4, 11 घर ऐसे भाव हैं जो जमीन या संपत्ति होने का संकेत देते हैं।

• लग्न भाव, वह भाव है जो व्यक्ति के स्वयं की योग्यता और शारीरिक क्षमता दर्शाता है। शारीरिक रुप से स्वस्थ होने के बाद ही कोई व्यक्ति अपना घर या अपने जीवन की योजनाओं को पूरा कर सकता है।

• दूसरा भाव - यह व्यक्ति के बैंक बैलेंस का भाव है। अगर किसी के पास धन नहीं होगा तो आप घर नहीं खरीद पाएंगे।

• चौथा घर - चौथा भाव संपत्ति, खुशी और वाहनों का भाव होता है। इस प्रकार इस भाव की स्थिति को देश या विदेश, किस स्थान पर संपत्ति होगी यह जानने के लिए देखा जाता है।

• ग्यारहवां घर - यह लाभ और इच्छाओं की पूर्ति का मुख्य भाव है। यह वह भाव है जो यह तय करता है कि आपको खुद के घर की खुशी होगी या नहीं। अपना घर कब प्राप्त होगा इसके लिए महादशा का विचार किया जाता है। किसी व्यक्ति के पास मूलसंपत्ति होगी या नहीं यह महादशा तय करती है।

• चतुर्थेश, द्वितीयेश, एकादशेश और नवमेश्फ़ की दशाएं व्यक्ति को घर देने में सक्षम होती है।

• अपना घर किस आयु में मिलेगा इसके लिए निम्न रुप से ग्रहों का अध्ययन किया जाता हैं। जब कोई ग्रह बली, उच्चस्थ, मूलत्रिकोण और मजबूत स्थिति में होकर चतुर्थेश, चतुर्थ भाव, आयेश, नवमेश और द्वितीयेश को प्रभावित करें तो ऐसा ग्रह घर देने की योग्यता रखता है। जैसे-

• कम आयु में घर प्रदान करने का कार्य चंद्र ग्रह करता है।

• मध्यम आयु में घर प्रदान करने के लिए सूर्य और मंगल का अध्ययन किया जाता है।

• सूर्य उत्तरायन में और चंद्र जीवन के प्रारम्भिक वर्षों में घर देता है।

• बुध 32 से 36 की आयु में घर दे सकता है।

• बृहस्पति, शुक्र और राहु कम उम्र में संपत्ति दे सकते हैं।

• शनि संपत्ति 44 की आयु के बाद और केतु 52 साल बाद भी दे सकता है।

अन्य योग

• घर हेतु भूमि क्रय करने के लिए, कुंडली का चौथा भाव मजबूत होना चाहिए।

• जमीन या संपत्ति प्राप्त करने के लिए मंगल और चौथा भाव महत्वपूर्ण कारक माना गया है। इसलिए, किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति मजबूत और शुभ होनी चाहिए।

• जब मंगल कुंडली में चौथे भाव के साथ संबंध बनाता है तो व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी जमीन या संपत्ति खरीदने की स्थिति में आता है।

• यदि मंगल चतुर्थ भाव में अकेला स्थित हो तो व्यक्ति भूमि तो प्राप्त कर लेता है परन्तु संपत्ति सदैव ही किसी कानूनी पचड़े में फंसी रहती है।

• मंगल भूमि क्रय-विक्रय निर्धारित करता है तो शनि ग्रह से भूमि पर निर्माण कार्य का अध्ययन किया जाता है।

• जब शनि या मंगल दशा या अंर्तदशा के दौरान चौथे भाव के स्वामी के साथ संबंध बनाते है तो व्यक्ति भूमि प्राप्त करता है।

• चतुर्थ भाव पर जब शुभ ग्रह अपना प्रभाव डालते है तो घर में खुशहाली आने की संभावनाएं बनती है।

• एक व्यक्ति अपना घर या संपत्ति खरीदने में असमर्थ होता है जब चतुर्थ भाव के स्वामी पर अशुभ ग्रह अपना प्रभाव डालते हैं।

• जब चतुर्थेश और लग्नेश दोनों एक दूसरे के साथ संबंध बनाते है तो व्यक्ति एक से अधिक संपत्ति अर्जित कर सकता है।

• जब प्रथम भाव का स्वामी चौथे घर में स्थित होता है तो व्यक्ति के एक से अधिक भूमि प्राप्ति की संभावनाएं बनती है।

• यदि चौथे घर का स्वामी प्रथम भाव में स्थित है तो अधिग्रहित भूमि व्यक्ति की आजीविका का स्रोत बन सकती है।

• जब चतुर्थेश भाव का स्वामी अष्टम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को संपत्ति प्राप्त करने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

• जब मंगल कुंडली में 8 वें भाव के साथ संबंध बना रहा हो तो व्यक्ति पैतृक संपत्ति प्राप्त कर सकता है।

• जब चौथा, 8 वां और ग्यारहवां भाव एक संबंध बनाते हैं तो व्यक्ति अपने जीवनकाल में संपत्ति बनाना सुनिश्चित करता है और यह भी संभव है कि इस व्यक्ति के भाई इसमें योगदान दें।

• जब चौथा घर बारहवें घर के साथ संबंध बनाता है तो एक व्यक्ति विदेश में या ऐसी जगह पर संपत्ति खरीदता है जो अपने घर से बहुत दूर हो।

• कुंडली में बनने वाले योग नवांश कुंडली में भी मजबूत स्थितियों में होने चाहिए।

• भूमि अधिग्रहण के लिए सभी योगों को जन्म कुंडली, नवांश कुंडली और चतुर्थांश कुंडली में भी देखा व इनका मूल्यांकन किया जाता है।

यदि भूमि प्राप्त करने के योग तीनों कुंडलियों में मजबूत हैं, तब ही कोई व्यक्ति जीवन में संपत्ति खरीद या प्राप्त कर सकता है। यदि घर खरीदने के योग सभी कुंडलियों में मजबूत नहीं हैं, तो एक व्यक्ति को जमीन खरीदने या अधिग्रहण करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

• जब अशुभ शनि कुंडली के चौथे भाव पर अपना प्रभाव डालता है तो व्यक्ति घर की खुशियों से वंचित रह जाता है। ऐसे व्यक्ति को संपत्ति अर्जित करने के लिए जीवनकाल में कई घरों को बदलना पड़ सकता है।

• जब चौथा भाव कुंडली के छठे भाव के साथ संबंध बना रहा हो तो व्यक्ति को संपत्ति से मामलों में अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ता हैं, अथवा ऐसे व्यक्ति को जमीन खरीदने के लिए ऋण लेना पड़ता है।

• जब चौथा घर दूसरे घर के साथ संबंध बनाता है तो एक व्यक्ति अपने माता-पिता से संपत्ति प्राप्त कर सकता है।

• जब चतुर्थ भाव नवम भाव से संबंध बना रहा होता है तो व्यक्ति अपने पिता से भूमि प्राप्त कर सकता है।

• हम सभी ने कई बार ध्यान दिया होगा कि किसी व्यक्ति के पास अपना घर होता है लेकिन वह अपने घर में नहीं रह पाता हैं, इसकी जगह वह घर से दूर किसी ओर जगह रहता है, इस स्थिति के कई कारण हो सकते हैं। अनेक ऐसे घर है जो व्यक्ति को अपने घर से दूर रखते हैं। सूर्य, बुध और राहु पृथकतावादी ग्रह हैं। यदि कुंडली के चौथे भाव का स्वामी सूर्य, बुध या राहु (किसी भी दो के साथ) के बीच कोई संबंध है तो व्यक्ति अपने घर से दूर के स्थान पर रहता है।

• जैसा कि सर्वविदित है कि शुक्र ग्रह सांसारिक विषयों का प्रतिनिधि करता है। कमजोर शुक्र जातक को सांसारिक सुख से वंचित करता है। यदि शुक्र ग्रह अशुभ है, जो पुरुष ग्रहों (सूर्य, मंगल, राहु, केतु, शनि) से प्रभावित है या दुर्बल है तो यह बहुत संभव है कि व्यक्ति सुख और आराम के अपने संसाधनों का उपयोग करने में असमर्थ होगा। अन्य लोग अपने धन और संसाधनों का उपयोग करते हैं, अन्य लोग उसके रिश्तेदार या दोस्त हो सकते हैं।

• यदि चौथे भाव का स्वामी प्रतिगामी (वक्री) है तो जातक अपने घर का उपयोग नहीं कर सकता है। या तो उसका घर खाली रह सकता है या किरायेदार अपने घर का उपयोग करता है।

• यदि नवमांश कुंडली में चौथे घर का स्वामी उच्च (शक्तिशाली स्थिति में) है तो जातक को विवाह के बाद घर मिलता है। यदि नवमांश चार्ट में चतुर्थ भाव में स्थित ग्रह उच्च का हो जाता है तो जातक को वही परिणाम मिलते हैं।

• बारहवें घर का स्वामी किसी तरह चौथे घर से संबंधित होता है, तो उसे अपना पूरा जीवन किराए के घर में बिताना पड़ सकता है।

• विदेशी भूमि में अपना घर बनाने के लिए छठे भाव का स्वामी, आठवें भाव और बारहवें भाव का स्वामी चतुर्थ घर से संबंध बनाते है या इन सब से किसी तरह चौथे घर से संबंधित हैं अथवा ये अपने से छठे घर, आठ घर या बारहवें घर में बैठते हैं तो व्यक्ति विदेशी भूमि पर अपना घर बनाता है।

• चतुर्थेश यदि जन्म कुंडली एवं नवमांश कुंडली में मेष, कर्क, तुला और मकर राशि में स्थित हो तो व्यक्ति अपने सारे जीवन में घर बदलता रहता है, एक लम्बी अवधि के लिए वह कभी एक घर में रुक कर नहीं रहता है।

• चतुर्थेश यदि जन्मकुंडली व नवमांश कुंडली में वॄषभ, सिंह, वृश्चिक और धनु राशि में स्थित हो तो व्यक्ति लम्बी अवधि के लिए एक ही घर में रहता है।

• जन्मकुंडली में चतुर्थ भाव का मंगल यदि राहु व शनि से प्रभावित हो तो व्यक्ति को बार-बार गृह क्लेश का सामना करना पड़ता है। उसे ऐसे घर में रहना पड़ता है जिसमें अनगिनित समस्याएं होती है। सरल शब्दों में कहे तो व्यक्ति राहत की सांस नहीं ले पाता है।

• बुध एवं राहु दोनों चतुर्थ भाव पर अपना प्रभाव डालते है तो व्यक्ति को अपने घर में सकून महसूस नहीं होता है।

संपत्ति की प्राप्ति के बाद आईये अब संपत्ति के नुकसान पर भी चर्चा कर लेते हैं-

• यदि चौथे घर का स्वामी तीसरे भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को संपत्ति का नुकसान होने के योग बनते है।

• यदि चतुर्थेश किसी पाप ग्रह के द्वारा पीड़ित हो तो व्यक्ति जीवन में किसी भी समय संपत्ति के नुकसान का सामना करना पड़ता है।

• यति चतुर्थेश त्रिक भावों में स्थित हो तब भी हानि की संभावनाएं बहुत अधिक बनती है।

• यदि चतुर्थेश कमजोर हो, शनि-मंगल जन्मकुंड्ली और नवांश दोनों में कमजोर हो तो व्यक्ति की संपत्ति का नुकसान होने की बहुत अधिक संभावना बनती है।

• यदि अशुभ ग्रह चौथे भाव या चौथे भाव के स्वामी को प्रभावित करते हैं तो उनके समय में व्यक्ति को संपत्ति से संबंधित नुकसान दे सकते हैं।