All Articles Read Articles in English

नाड़ी दोष एक शास्त्रीय चिन्तन

भारतीय सनातन परम्परा में धर्म अर्थ काम त्रिविध पुरूषार्थं सिद्धि के लिये तथा सर्वश्रेष्ठ गृहस्थ आश्रम के निर्वाह के लिये विवाह संस्कार कि नितान्त आवश्यकता होती है। विविध परीक्षणों से यह सिद्ध होता है कि वैदिक विधि से तथा ज्योतिष शास्त्रीय मेलापक द्वारा किये गये विवाह चिरकाल तक निर्बाध रूप से स्थायी होते हैं। विवाह पूर्व वर एवं बधू के जन्मनक्षत्रों का ज्योतिषीय विधि से विविध प्रकार का परीक्षण किया जाता है जिसे हम मेलापक, आनुकूल्य या प्रीति कहते हैं। विवाह मेलापक में विविध प्रकार के कूटों का अनुप्रयोग किया जाता है जिनकी संख्या 8, 10, 12, 18, 20, 23 अब तक के व्यक्तिगत शोध अध्ययन से यह ज्ञात हुआ है कि विवाह में समवेत रूप से अधिकतम 23 प्रकार के मेलापक का विचार विवाह पूर्व वर एवं वधू में किया जाता है किन्तु इन सबका प्रयोग सम्बन्धित क्षेत्रों तक ही सीमित है तथा विशेष परिस्थितियों में इनका प्रयोग किया जाता है। जिसमे 4 मेलापक राशि से, 1 मेलापक ग्रह से, 16 मेलापक नक्षत्रों से, तथा आयु एवं शक्ति (प्रेम मेलापक से करते हैं।

गणेश त्रिपाठी | 01-Sep-2014

Views: 15687